पवन खेड़ा का मामला: न्यायपालिका के बदलते रुख
भारत की न्यायपालिका समय-समय पर विलक्षण कार्य करते रहती है। कांग्रेस पार्टी के एक बड़े प्रवक्ता पवन खेड़ा का मा...
भारत की न्यायपालिका समय-समय पर विलक्षण कार्य करते रहती है। कांग्रेस पार्टी के एक बड़े प्रवक्ता पवन खेड़ा का मा...
यह एक गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में क्या विपक्ष के नेता की उपस्थिति आवश्यक है?...
भारत के अनेक उच्च शिक्षित संस्थानों के प्रमुख लोगों ने राष्ट्रपति को संयुक्त रूप से एक पत्र लिखा है, जिसमें उन...
वर्तमान इजरायल-ईरान युद्ध में भारत सरकार ने जिस तरह कमाल का काम किया है, उसके लिए सरकार को बधा...
27 जनवरी, प्रातःकालीन सत्रदुनिया में क्रिया की प्रतिक्रिया अवश्य होती है। क्रिया सामान्यतः सोच-समझकर, योजना के...
मैंने आज एक प्रसिद्ध विद्वान विपिन पब्बी का एक लेख पढ़ा। इस लेख में उन्होंने यह सिद्ध करने का प्रयास किया है क...
तमिलनाडु के मदुरई में एक पहाड़ी पर एक मंदिर स्थित है और उसी मंदिर से कुछ दूरी पर एक दरगाह भी है। इस मंदिर और द...
वर्तमान भारत में हमारी राजनीतिक व्यवस्था में एक बहुत बड़ी बीमारी घर कर गई है कि हम नम...
संशोधित संस्करण: भारत में अपराध संबंधी कानून स्वतंत्रता से लगभग आठ वर्ष पूर्व ही बनाए गए थे। अंग्रेज ...
27 जुलाई प्रातः कालीन सत्र हम सभी व्यक्ति मिलकर एक संसद चुनते हैं। उस संसद में 543 लोग चुने जाते हैं वह सांसद ...
शीशे की दीवार और न्यायपालिका की गंभीरता हाल ही में समाचार प्राप्त हुआ है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक या दो...