यदि हम निष्पक्ष रूप से समीक्षा करें, तो भारत में एक अलग प्रकार का प्रश्नकर्ता वर्ग तैयार हो चुका है।
पिछला वर्ष लगभग समाप्त हो चुका है। यदि हम निष्पक्ष रूप से समीक्षा करें, तो भारत में एक अलग प्रकार का प्रश्नकर्ता वर्ग तैयार हो चुका है। इस वर्ग में वे लोग शामिल हैं जो केवल प्रश्न करना जानते हैं, कभी उत्तर या समाधान नहीं देते। इन्होंने लोकतंत्र का अर्थ यह समझ लिया है कि लोकतंत्र में उन्हें केवल प्रश्न करने की छूट है, जबकि उनसे कोई प्रश्न नहीं कर सकता।
इस प्रकार के वर्ग में भारत की पूरी न्यायपालिका, मीडिया के अधिकांश हिस्से शामिल हो चुके हैं। वैसे तो पूरा विपक्ष प्रश्न करता ही रहता है, परंतु उसमें भी राहुल और प्रियंका जैसे नेता नेतृत्व कर रहे हैं। लगभग सभी पर्यावरणवादी भी केवल प्रश्नकर्ता बन चुके हैं। स्थिति यह है कि भारत की लगभग एक चौथाई आबादी ऐसी तैयार हो गई है जो केवल सवाल करना जानती है, समाधान या उत्तर देना नहीं।
हम खेती करें, व्यापार करें, मजदूरी करें, मेहनत करें और ये प्रश्नकर्ता केवल हमारा प्रतिनिधित्व करें—सरकार से सवाल पूछें, मुफ्त का उपभोग करें, हराम की नेतागिरी करें, न कोई उत्पादन करें और न ही व्यवस्था में कोई वास्तविक भूमिका निभाएँ। इन निठल्ले वर्गों से भारत की कोई भी व्यवस्था सवाल नहीं कर सकती, क्योंकि सवाल करने की ठेकेदारी इन्होंने ही अपने हाथ में ले रखी है।
इस प्रकार का जो निठल्ला वर्ग तैयार हो रहा है, वह अत्यंत खतरनाक है। यह ऐसा वर्ग बन गया है जो हर प्रकार की सुविधा तो चाहता है, लेकिन किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं देना चाहता। इसलिए नए वर्ष में मेरा सुझाव है कि इन प्रश्नकर्ताओं का सामाजिक बहिष्कार किया जाए। ये केवल प्रश्न न करें, इन्हें उत्तर भी देना पड़े। ये केवल उपभोग न करें, इन्हें उत्पादन भी करना पड़े। ऐसी एक नई व्यवस्था बननी चाहिए।
पिछला वर्ष अब समाप्त हो रहा है। सरकार ने एक बहुत ही अच्छा कार्य किया कि उन्होंने मनरेगा को खत्म कर दिया और उसकी जगह एक साफ सुथरी योजना प्रस्तुत कर दी। सबसे गंदा काम पिछली सरकार ने किया था कि नरेगा को बाद में मनरेगा बना दिया। नरेगा एक बहुत अच्छी योजना थी लेकिन उसमे नेहरू परिवार ने गांधी शब्द को इसलिए जोड़ा क्योंकि वे तो अपने को गांधी परिवार का ही मानते हैं और उनका मानना है कि गांधी शब्द से अब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पहचाने जाएंगे पुराने गांधी तो अब चले गए इसलिए गांधी शब्द जोड़ा गया। दूसरी उसमें गंदगी फैलाई गई की नरेगा के मुख्य उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया गया। नरेगा का मुख्य उद्देश्य था पिछड़े हुए क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलना लेकिन एक षडयंत्र के अंतर्गत नरेगा की मजदूरी अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग कर दी गई जिससे पिछड़े क्षेत्रों में और फॉरवर्ड क्षेत्र का अंतर बढ़ता चला गया यह एक षड्यंत्र था। नई योजना में इस षड्यंत्र से बचने की कोशिश की गई है। क्योंकि अब इस योजना में यदि कोई प्रदेश मजदूरी बढ़ाएगा तो उस प्रदेश को भी हिस्सा देना पड़ेगा यह बहुत ठीक हुआ है। अब विकसित क्षेत्रों में इन योजनाओं को नहीं चलाया जाएगा सिर्फ पिछडे क्षेत्र में ही रोजगार दिया जाएगा इसलिए नरेगा को मनरेगा में बदलकर जो षड्यंत्र किया गया था अब नई योजना में उसे षडयंत्र से बचा गया है गांधी शब्द को निकाल बाहर किया गया है। मैं तो इस बात का भी पक्षधर हूं की गांधी शब्द को अब सरकार रिजर्व घोषित कर दे और कोई भी अन्य व्यक्ति जो गांधी परिवार का नहीं है वह अपने नाम के साथ गांधी लिखने की गलती ना करें।
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