छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। बताया गया कि एक व्यक्ति की हत्या की सूचना पर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन लगभग दो महीने बाद वही व्यक्ति जीवित लौट आया। इससे यह गंभीर प्रश्न उठता है कि पुलिस ने यह कार्रवाई जानबूझकर की या किसी बड़ी भूल के कारण ऐसा हुआ। जो भी कारण रहा हो, यह स्थिति बेहद चिंता पैदा करने वाली है और पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

इस घटना को गहराई से देखने पर पुलिस की कुछ व्यावहारिक मजबूरियां भी सामने आती हैं। किसी घटना की सूचना मिलते ही एफआईआर दर्ज होती है और सामान्यतः पुलिस को यह मानकर चलना पड़ता है कि शिकायतकर्ता सच बोल रहा है। उसी आधार पर तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। दूसरी ओर, मीडिया और जनप्रतिनिधियों का दबाव भी तेजी से बढ़ जाता है। 24 या 48 घंटे बीतते ही सवाल उठने लगते हैं, प्रदर्शन होने लगते हैं और नेताओं के फोन आने लगते हैं। ऐसे माहौल में पुलिस पर जल्द से जल्द किसी को गिरफ्तार कर चालान पेश करने का दबाव बन जाता है।

मेरे विचार से अब इस व्यवस्था पर पुनर्विचार आवश्यक है। किसी भी रिपोर्ट को प्रारंभ से ही पूर्ण सत्य मानने के बजाय यह संभावना भी ध्यान में रखी जानी चाहिए कि वह गलत या भ्रामक हो सकती है। साथ ही, मीडिया और जनप्रतिनिधियों को भी संयम बरतना चाहिए और जांच की एक न्यूनतम समय-सीमा पूरी होने के बाद ही दबाव बनाना चाहिए। जल्दबाजी में की गई कार्रवाइयां न केवल निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी कमजोर करती हैं।