समाज को टुकड़ों में बाँटने वाली वैश्विक योजना
10 जनवरी प्रातःकालीन सत्र
हम पिछले कई दिनों से समाज को टुकड़ों में बाँटने वाली वैश्विक योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। हमने धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्रीयता, उम्र और लिंग जैसे विषयों पर विचार कर लिया है, लेकिन समाज को तोड़ने में सबसे अधिक भूमिका साम्यवादियों की रही है। साम्यवादियों ने गरीब और अमीर के बीच टकराव को सबसे प्रभावी ढंग से समाज में फैलाया है।
गरीब और अमीर की यह भावना पूरी दुनिया में इस तरह घर कर गई है कि लगभग हर व्यक्ति इससे प्रभावित है, जबकि न सभी गरीब अच्छे होते हैं और न सभी अमीर बुरे होते हैं। अभी दो दिन पहले ही एक प्रसिद्ध उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने अपनी बहुत बड़ी संपत्ति समाज को दान करने की घोषणा की है। इससे पहले भी कई बड़े उद्योगपतियों ने अपनी संपत्ति समाज के लिए दान की है।
फिर भी साम्यवादियों के प्रचार के प्रभाव में आमतौर पर गरीबों के भीतर अमीरों के प्रति नफरत का भाव पैदा किया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि गरीब और अमीर एक-दूसरे के सहायक होते हैं, विरोधी नहीं। गांधीजी ने भी मजदूर–महाजन का नारा दिया था। इसलिए अब समय आ गया है कि हम सभी गरीब और अमीर के नाम पर समाज को विभाजित करने वाली योजनाओं को असफल करें।
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