उड़ीसा प्रदेश के भद्रक ज़िले में एक महिला ने अपनी नवजात बच्ची किसी दूसरे परिवार को दे दी
उड़ीसा प्रदेश के भद्रक ज़िले में एक महिला ने अपनी नवजात बच्ची किसी दूसरे परिवार को दे दी, और उस परिवार ने उस महिला को 35,000 रुपये दिए। मेरे विचार से इसमें कौन-सा अपराध हुआ? बच्ची को देने वाली महिला भी सहमत थी और बच्ची को लेने वाला परिवार भी सहमत था। लेकिन पेशेवर मानवाधिकार कार्यकर्ता असहमत हो गए।
अच्छा होता कि मानवाधिकारवादी स्वयं उस बच्ची को एक लाख रुपये में ले लेते—कौन उन्हें रोक रहा था? सरकार ने उस महिला पर अपराध दर्ज कर दिया। उस महिला ने बच्ची की हत्या नहीं की, बल्कि उसे जीवित अवस्था में सौंपा। मैं अब तक यह नहीं समझ सका कि इस मामले में मानवाधिकारवादी या सरकार किस आधार पर हस्तक्षेप कर सकती है।
अब तक मैं यही सुनता आया था कि छोटे बच्चों को लोग पैसे देकर गोद लेते हैं, लेकिन अब यह सुन रहा हूँ कि छोटी-छोटी बच्चियाँ भी यदि इतना महत्व पा रही हैं तो इसमें किसी को जलन क्यों होनी चाहिए?
उस महिला ने आर्थिक संकट के कारण बच्ची दी या किसी अन्य समस्या के कारण—यह बात वही महिला बेहतर बता सकती है। लेकिन मेरे विचार से इसमें किसी प्रकार का कोई अपराध नहीं हुआ है। यदि यह कानून की दृष्टि से गलत है, तो फिर कानून गलत है और कानून में बदलाव होना चाहिए, न कि उस महिला को अपराधी ठहराया जाए जिसने अपनी बच्ची को किसी और को सौंपा।
इस पूरे लेन-देन को किसी भी प्रकार का अपराध मानना, मेरे विचार से, पूरी तरह गलत है।
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