भारत कितना बदल गया है, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि नसीरुद्दीन शाह जैसे

भारत कितना बदल गया है, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि नसीरुद्दीन शाह जैसे सांप्रदायिक व्यक्ति को दस वर्ष पहले एक बहुत बड़ा और नामी कलाकार घोषित कर दिया गया था। उस समय पूरे देश में उनकी तूती बोलती थी।
लेकिन जैसे ही नेहरू परिवार की राजनीतिक छाया समाप्त हुई, नसीरुद्दीन शाह स्वयं रोना रोते दिखाई देने लगे। अब कोई उन्हें पूछ नहीं रहा है। कुछ दिन पहले उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह दुख व्यक्त किया कि पिछले दस वर्षों से उन्हें कोई काम नहीं मिल रहा है। पुराने समय में उन्हें मनमानी प्रतिष्ठा और सम्मान दिया जाता था, जबकि वर्तमान समय में उन्हें कोई महत्व नहीं देता।
उन्होंने हाल ही में यह भी बताया कि मुंबई में उन्हें एक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन ठीक समय पर आयोजकों ने उन्हें बुलाने से इनकार कर दिया। क्यों इनकार किया गया—इसका वास्तविक कारण शाह ने स्वयं ही स्पष्ट कर दिया। उनका कहना था कि वे जहाँ भी जाते हैं, वहाँ नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हैं।
अब आप स्वयं विचार कीजिए—जहाँ प्रसंग हो या न हो, यदि आप हर मंच पर जबरदस्ती किसी की आलोचना करेंगे, और जहाँ भी जाएंगे वहाँ केवल सांप्रदायिक मुसलमानों की प्रशंसा करेंगे, तो वर्तमान समय में समाज की प्रतिक्रिया स्वाभाविक ही होगी।
यह मानकर चलना भूल है कि आज भी भारत में नेहरू परिवार की सरकार चल रही है।