सुशासन बनाम स्वशासन: आने वाले दशक की राजनीतिक दिशा

26 मार्च प्रातःकालीन सत्र में आज रायपुर लौटकर आ गया हूँ। वाराणसी के साथ-साथ रामानुजगंज भी गया था। रामानुजगंज में मेरे कई मित्रों ने यह बात जाननी चाही कि वर्तमान भारत की राजनीतिक परिस्थितियाँ भविष्य में किस दिशा में जा रही हैं।

मुझे उन मित्रों ने यह भी याद दिलाया कि मैं आमतौर पर भविष्यवाणी नहीं करता, लेकिन जो भी 10–15 बार भविष्यवाणियाँ की गईं, वे लगभग सच निकलीं, इसलिए वे इस विषय पर जानने के लिए अधिक उत्सुक हैं। मैंने उन्हें भारत की राजनीतिक परिस्थितियों के भविष्य के विषय में जो कुछ बताया, उसके अनुसार आगामी 5 या 7 वर्षों के बाद भारत में दो ही राजनीतिक दल अस्तित्व में रहेंगे—एक राजनीतिक दल संघ के नेतृत्व में होगा और एक भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में। अन्य सभी राजनीतिक दल इन दोनों के साथ आपस में बँट जाएँगे।

विचारधारा के रूप में एक ऐसी नई शक्ति भी तैयार होगी जो संघ के सरीखा निरंतर आगे बढ़कर इन दोनों राजनीतिक दलों के बीच एक तीसरा विचार प्रस्तुत करेगी। इस तरह वर्तमान में संतुलन बनाने का जो कार्य संघ कर रहा है, वह कार्य एक नया समूह करने में समर्थ हो सकेगा। मेरा इस तरह का भविष्य का अनुमान है—यह सही या गलत है, यह भविष्य में पता चलेगा। युग परिवर्तन के लिए यह परिस्थितियाँ अनुकूल दिखती हैं।

आज मैंने एक पोस्ट लिखी थी, जिसके अनुसार संघ और भाजपा सत्ता और विपक्ष में विभाजित होकर सत्ता-संघर्ष में उलझ जाएँगे। अन्य राजनीतिक दलों का अस्तित्व लगभग नगण्य हो जाएगा। साथ में एक तीसरी विचारधारा का उदय होगा, जो संघ का विकल्प बनेगी। यह तीसरी शक्ति धर्मनिरपेक्ष होगी, जबकि संघ और भारतीय जनता पार्टी हिंदुत्व पर आश्रित होंगी। इस तीसरी शक्ति का मार्ग नरम हिंदुत्व होगा।

यह तीसरी शक्ति सत्ता-निरपेक्ष भी होगी और समाज को सर्वोच्च मानेगी। दोनों राजनीतिक दल राष्ट्र या धर्म की सर्वोच्चता पर निर्भर होंगे। दोनों राजनीतिक दल ईमानदार सरकार स्थापित करने का प्रयत्न करेंगे, जबकि तीसरी शक्ति सत्ता की ईमानदारी पर नहीं, बल्कि नागरिकों की ईमानदारी पर विश्वास करेगी।

दोनों राजनीतिक दल कानून का शासन स्थापित करेंगे, जबकि तीसरी विचारधारा समाज के अनुशासन को महत्वपूर्ण बनाएगी। दोनों दलों के सत्ता-संघर्ष से परेशान होकर जनता तीसरे विकल्प की तरफ झुकेगी। दोनों दलों का नारा “सुशासन” होगा और तीसरी विचारधारा का नारा “स्वशासन” होगा।

मुझे उम्मीद है कि अगले 10 वर्षों में इस प्रकार का बदलाव संभव दिखता है।