नक्सलवाद और राजनीतिक समर्थन पर उठते सवाल

यह बात साफ हो गई है कि भारत में नक्सलवाद को कांग्रेस पार्टी के एक गुटका मौन समर्थन प्राप्त था। न्यायपालिका के भी कुछ लोग इस षड्यंत्र में शामिल थे लेकिन अब नक्सलवाद के छत्तीसगढ़ से समाप्त होने के बाद भी कांग्रेस पार्टी अपने दांव पेच में सक्रिय है। कल राहुल गांधी तथा छत्तीसगढ़ के प्रमुख नेता भूपेश पटेल ने यह मांग की है की अब छत्तीसगढ़ से अर्ध सैनिक बलों को हटा लेना चाहिए। आश्चर्य है की नक्सलवाद के समाप्त होने की घोषणा के एक दिन के अंदर अंदर कांग्रेस पार्टी इस प्रकार का समाज को धोखा देने का प्रयास कर रही है क्योंकि कांग्रेस पार्टी का यह मानना है की अर्ध सैनिक बलों के ताकत पर नक्सलवाद समाप्त हुआ है और अर्धसैनिक बलों को यदि तुरंत हटा दिया जाए तो फिर से नक्सलवाद पैदा किया जा सकता है और तब सरकार के दावे पर सवाल भी खड़े किये जा सकते हैं। लेकिन सरकार इस संबंध में सावधान है हम तब तक नक्सलवाद को एक खतरा मानते रहेंगे तब तक जब तक नक्सलवाद की जनक नेहरू परिवार और कांग्रेस पार्टी का अस्तित्व रहेगा और उस खतरे को टालने के लिए हम अर्ध सैनिक बलों की उचित मात्रा अवश्य बनाए रखने के पक्ष में हैं‌। मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि वह कांग्रेस पार्टी की इस धोखेबाजी से सावधान रहे