प्रभावी अपराध नियंत्रण से आदर्श समाज व्यवस्था की परिकल्पना
16 अप्रैल प्रातःकालीन सत्र। अपराध नियंत्रण की गारंटी पर चर्चा।
हमारे देश की तंत्र व्यवस्था इस बात को जानती ही नहीं है कि अपराध क्या है, गैरकानूनी क्या है और अनैतिक क्या है। वह तो सबको अपराध मानकर ही उसी अनुसार निर्णय करती है, जबकि सच बात यह है कि अपराध सिर्फ एक-दो प्रतिशत ही होते हैं; बाकी कार्य अपराध नहीं होते, और सरकार उन सब कार्यों को भी लगातार रोकथाम की सक्रियता से करती रहती है।
मैंने कल बताया था कि अपराध कुल मिलाकर पाँच प्रकार के होते हैं, और वे पाँच कार्य भी सिर्फ दो ही प्रकार के होते हैं—एक है बल प्रयोग और दूसरा है धोखाधड़ी। इन पाँच कार्यों में से चोरी, मिलावट, कम तौलना—ये सब जालसाजी और धोखाधड़ी के अंतर्गत शामिल होते हैं, जबकि लूट, डकैती, बलात्कार, हिंसा—ये सब कार्य हिंसा के अंतर्गत आते हैं।
यदि सरकार सिर्फ इन दो प्रकार के अपराधों को रोक ले, तो भारत में राम राज्य आ जाएगा। बलात्कार अपराध होता है, वेश्यालय या बार वालों का डांस नहीं। मिलावट और कम तौलना अपराध होता है, ब्लैक करना या तस्करी करना नहीं। हिंसा अपराध होती है, गांजा रखना या तंबाकू खाना अपराध नहीं है।
लेकिन हमारी सरकार अनावश्यक बोझ उठाकर ब्लैक को रोकती है, तस्करी को रोकती है, बार-बालाओं और वेश्यालयों को रोकती है, गांजा और तंबाकू को रोकती है। जो शक्ति जहाँ लगनी चाहिए थी, वहाँ न लगाकर दूसरी जगह लगाई जाती है—इसी के कारण अपराध नहीं रुक रहे हैं। अन्यथा अपराधों को रोकना कोई कठिन कार्य नहीं है।
सबसे पहले यह जरूरी है कि अपराध क्या है, गैरकानूनी क्या है, अनैतिक क्या है, और सरकार को कितना रोकना है—यह बात सरकार को स्पष्ट रूप से जानकारी में होनी चाहिए।
मैं आपको गारंटी देता हूँ कि नई समाज व्यवस्था में हम एक महीने के अंदर भारत को अपराध-मुक्त बना देंगे।
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