नकली संघ बनाम वास्तविक संघ: विचारधारा और व्यवहार का अंतर

भारत में कुछ ऐसे भी संघ वाले पैदा हो गए हैं, जो अपने को संघ के कार्यकर्ता तो कहते हैं, लेकिन दिन-रात संघ की नीतियों के विरोध में ही कार्य करते रहते हैं। संघ पिछले कई वर्षों से गांधी की दिशा में बढ़ रहा है, लेकिन ये नकली संघ वाले दिन-रात गांधी को गाली देते रहते हैं।

संघ लगातार इस दिशा में सोच रहा है कि जो लोग भारत को अपनी मातृभूमि मानते हैं, वे सब भारतीय हैं, वे सब हिंदू हैं—भले ही वे मस्जिद में नमाज़ पढ़ें या मंदिर में पूजा करें, भले ही वे चोटी रखते हों या दाढ़ी रखते हों। लेकिन ये नकली संघ वाले दिन-रात आम मुसलमानों को गाली देते रहते हैं।

संघ के वास्तविक लोग पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आने वाले मुसलमानों को विदेशी मानते हैं। ये नकली संघ वाले हर भारतीय मुसलमान को भी पाकिस्तानी या बांग्लादेशी मानते हैं। जब भी चर्चा होती है, तब ये नकली संघ वाले लोग नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत की इसलिए आलोचना करते हैं कि वे भारत में लोकतंत्र के पक्षधर हैं, तानाशाही के नहीं।

हम मुसलमानों को समान अधिकार देने के लिए बाध्य हैं; हम उनके सामान्य लोकतांत्रिक अधिकार छीन नहीं सकते। लेकिन ये नकली संघ वाले दिन-रात यह प्रचार करते हैं कि मुसलमानों को भारत में समानता का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। हम लगातार भारत में मुसलमानों के विशेष अधिकार कानून के माध्यम से समाप्त कर रहे हैं, व्यवहार में नहीं। ये नकली लोग कानून से अधिकार छीनने की तुलना में व्यावहारिक धरातल पर अधिक ज़ोर देते हैं।

मुझे खुशी है कि भारत में असली संघ लगातार बढ़ रहा है और नकली संघ वाले लगातार कमजोर हो रहे हैं। जल्द ही वह दिन देखने को मिलेगा जब भारत के नकली गांधीवादी और नकली संघ-प्रेमी, दोनों एक साथ मिलकर नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत का विरोध करेंगे।