The New Social Order and Individual Liberty

8 मई, प्रातःकालीन सत्र — नई समाज व्यवस्था पर चर्चा।

हम व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को उसका मौलिक अधिकार मानते हैं। किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता को तब तक बाधित नहीं किया जा सकता, जब तक उसने किसी अन्य व्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधा न पहुँचाई हो। इस सिद्धांत का पूर्ण रूप से पालन किया जाएगा।

किसी भी समझौते के अंतर्गत व्यक्ति की स्वतंत्रता तभी तक मान्य रहेगी, जब तक वह स्वयं को उस समझौते से बंधा हुआ मानता है। यदि कोई ऐसा समझौता हुआ है जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ समझौता किया गया हो, तो उस समझौते को किसी भी समय तोड़ा जा सकता है। उसके बाद राजनीतिक एवं संवैधानिक व्यवस्था जो निर्णय देगी, वह मान्य होगा, लेकिन किसी व्यक्ति को समझौता तोड़ने से रोका नहीं जा सकता।

स्पष्ट है कि व्यक्ति के मौलिक अधिकार हर परिस्थिति में सुरक्षित रहेंगे। कोई भी समझौता केवल समाज या राजनीतिक व्यवस्था के समक्ष एक गवाह के रूप में कार्य करेगा, लेकिन वह किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से बाध्य नहीं कर सकता।

इसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति अपने विवाह संबंध को कभी भी समाप्त कर सकता है। इसी प्रकार, कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से किए गए किसी समझौते को भी कभी समाप्त कर सकता है, यदि उसमें उसके मौलिक अधिकारों के साथ समझौता किया गया हो।

मैं जानता हूँ कि यह विषय अत्यंत जटिल और कठिन है, लेकिन आपके प्रश्नों का उत्तर देना मेरा दायित्व होगा।