डीजल-पेट्रोल की बढ़ती खपत और पर्यावरण संरक्षण पर नई सोच

मैंने 70 वर्ष पहले यह लिखा था कि दुनिया में जिस प्रकार डीजल, पेट्रोल और अन्य ईंधनों की खपत बढ़ रही है, उसके आधार पर भविष्य में पर्यावरण संकट लगातार बढ़ता जाएगा। आज यदि आप वर्तमान दुनिया की स्थिति देखें, तो दुनिया पर्यावरण संकट से लगातार परेशान है, लेकिन डीजल, पेट्रोल और कोयले की खपत घट नहीं रही है, क्योंकि इन्हीं को विकास का प्रमुख माध्यम मान लिया गया है।

सारी दुनिया में विकास के लिए इस बात की होड़ मची है कि कौन कितना डीजल, पेट्रोल, बिजली और गैस का उपयोग करता है। एक तरफ लोग डीजल-पेट्रोल का उपयोग करते हैं और दूसरी तरफ पर्यावरण का रोना भी रोते हैं।

यह बात सर्वविदित है कि डीजल, पेट्रोल, बिजली और कोयले की मूल्य वृद्धि उनकी खपत घटाने का सबसे अच्छा समाधान है। आज भारत के प्रधानमंत्री ने पहली बार देश को यह बात कही है कि आप डीजल-पेट्रोल का उपयोग कम कीजिए। आज तक किसी नेता या प्रधानमंत्री ने इस विषय को इस प्रकार नहीं उठाया था।

फिर भी हमारे प्रधानमंत्री डीजल-पेट्रोल की कीमत बढ़ाने से डर गए। उन्हें डीजल, पेट्रोल और बिजली का मूल्य बहुत अधिक बढ़ा देना चाहिए था, जिससे अनेक समस्याएँ अपने आप सुलझ जातीं। फिर भी प्रधानमंत्री ने इस दिशा में शुरुआत की है, यह अच्छा कदम है। दुनिया को इससे सबक सीखना चाहिए।