केशव चौबे जी की यादों से बलात्कार और व्यवस्था परिवर्तन तक की चर्चा
आज मेरी फोन पर अपने मित्र केशव चौबे जी से बात हुई। वह मुझसे भी 8 वर्ष बड़े हैं। अभी उनकी उम्र 95-96 वर्ष हो गई है। इसके बाद भी उनसे अच्छी चर्चा हुई। उन दिनों की याद ताज़ा हो गई, जब लगभग 46 वर्ष पहले मैं, केशव चौबे, रोशनलाल जी, लरंगसाय जी और रामविचार जी मिलकर 1500 किलोमीटर की एक महीने की सरगुजा की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा किए थे। उस समय हम सब मिलकर पूरे देश का भविष्य बदलने का सपना देख रहे थे। भविष्य बदला या नहीं बदला, यह तो पता नहीं है। लरंगसाय जी अब इस दुनिया में नहीं हैं, रोशनलाल जी भी नहीं हैं। रामविचार जी अभी छत्तीसगढ़ में मंत्री हैं। मैं अब रायपुर में रहकर आराम कर रहा हूं और चौबे जी इस उम्र में बिस्तर पर हैं। फिर भी हम लोगों को वह याद ज़रूर आती है कि हम लोगों ने भी यथाशक्ति व्यवस्था परिवर्तन के कार्य में अपनी धूल झाड़ी है। भले ही हम नल-नील न सिद्ध हो चुके हों, लेकिन गिलहरी के रूप में तो हमें इतिहास याद करेगा ही।
20 मई के प्रातःकालीन सत्र में मैं आमतौर पर व्यक्तिगत चर्चाएं करने से बचता हूं, फिर भी मैंने कल केशव चौबे जी तथा अपने कार्यालय के लिए गाड़ी की व्यक्तिगत चर्चा यही सोचकर की थी कि यह चर्चा भी आपके बीच जानी चाहिए।
अब मैं आज के विषय पर चर्चा करता हूं। बलात्कार लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारी नासमझ सरकार तथा मीडिया बलात्कार के कारणों पर विचार न करके गलत दिशा में कार्य कर रहे हैं। बलात्कार के चार कारण हो सकते हैं। पहला है पुरुषों में सेक्स की आवश्यकता की मात्रा, दूसरा है उनके अंदर सेक्स की बढ़ती इच्छाएं, तीसरा है सेक्स पूर्ति में आने वाली बाधाएं और चौथा है पुरुषों में सेक्स के प्रति भय का अभाव।
वर्तमान समय में आवश्यकता भी बढ़ रही है। खान-पान और जीवन-पद्धति आवश्यकताएं बढ़ा रही हैं। इच्छाएं भी बढ़ रही हैं, क्योंकि वर्तमान सामाजिक वातावरण जल्दी इच्छाएं पैदा कर रहा है और इच्छाओं को बढ़ा भी रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेक्स के मामलों में अनेक प्रकार की बाधाएं खड़ी कर दी गई हैं। महिला-पुरुष के संबंधों में भी अनेक प्रकार की बाधाएं हैं। वेश्यालय भी रोक दिए गए हैं। अप्राकृतिक सेक्स को भी रोक दिया गया है। इस प्रकार बड़ी-बड़ी बाधाएं खड़ी कर दी गई हैं। विवाह की उम्र भी बढ़ा दी गई है और यह नासमझ सरकार सिर्फ भय के आधार पर सेक्स को नियंत्रित करना चाहती है, जो बलात्कार के रूप में समाज के सामने विभत्स स्वरूप में प्रकट हो रहा है।
हम नई व्यवस्था में सेक्स को रोकने के लिए सारी बाधाएं दूर कर देंगे। हम अप्राकृतिक सेक्स की स्वतंत्रता देंगे, वेश्यालय भी खोल देंगे, विवाह की उम्र भी कम कर देंगे। हम बलपूर्वक किसी के साथ किए गए बलात्कार को ही अपराध मानेंगे, बाकी सब प्रकार की स्वतंत्रता दे देंगे। अन्य तरीकों से सेक्स पर नियंत्रण करना समाज का काम होगा, परिवार का काम होगा, सरकार का नहीं। हम दूसरों के काम में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
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