नई समाज व्यवस्था में विश्व समाज की अवधारणा
21 में प्रातःकालीन सत्र। नई समाज व्यवस्था में राष्ट्र व्यवस्था की अंतिम इकाई नहीं होगा, बल्कि अंतिम इकाई विश्व समाज को माना जाएगा। व्यवस्था की पहली इकाई परिवार को माना जाएगा। वर्तमान समय में भारत राज्यों का संघ है, जबकि नई व्यवस्था में भारत परिवारों का संघ बनेगा।
किसी भी मतदान में जो इकाई भाग लेगी, उसकी गणना उस इकाई की आबादी के आधार पर की जाएगी। अर्थात विश्व व्यवस्था में यदि भारत कहीं वोट देगा, तो वहाँ भारत की आबादी 140 करोड़ मानी जाएगी, न कि केवल एक मत।
इस व्यवस्था में प्रदेश सरकारें समाप्त हो जाएंगी। सरकार केवल एक होगी, जो केंद्र में होगी, और उसके अधिकार भी बहुत सीमित होंगे। अधिकांश अधिकार केंद्र सभा को चले जाएंगे। वर्तमान में प्रदेशों के स्थान पर केंद्र सभा की नई इकाइयाँ बनेंगी, जो परिवार स्तर तक जाएंगी। इस प्रकार भारत प्रदेशों का संघ न होकर परिवारों का संघ होगा और विश्व व्यवस्था का एक अंग बनेगा।
जब तक विश्व संविधान नहीं बनता और विश्व सरकार की स्थापना नहीं होती, तब तक अस्थायी रूप से हम भारत सरकार को मान्यता देते रहेंगे।
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