नई समाज व्यवस्था में सहभागी लोकतंत्र की स्थापना

28 में प्रातःकालीन सत्र

हम नई समाज व्यवस्था में परिवार में भी वैसा ही लोकतंत्र लागू करेंगे जैसा विश्व व्यवस्था में होगा या राष्ट्र व्यवस्था में होगा। हम जीवन-पद्धति से लोकतंत्र शुरू करेंगे, सिर्फ शासन-पद्धति में नहीं, जैसा अभी है। हम परिवार व्यवस्था में आदर्श लोकतंत्र बनाएंगे, विकृत लोकतंत्र नहीं, जैसा अभी भारत में या दुनिया में दिख रहा है।

स्पष्ट है कि हम संसदीय लोकतंत्र नहीं, बल्कि सहभागी लोकतंत्र बनाएंगे और यही लोकतंत्र परिवार से लेकर राष्ट्र तक और विश्व तक जाएगा। हम राष्ट्र की वर्तमान व्यवस्था में जो बीजेपी, कांग्रेस या अन्य दलगत राजनीति है, उसको पूरी तरह समाप्त कर देंगे। हम दलों की मान्यता नहीं रखेंगे, हम सिर्फ व्यक्तियों की मान्यता रखेंगे।

इस तरह आदर्श लोकतंत्र दलीय लोकतंत्र नहीं होगा, बल्कि संसद में प्रत्येक सांसद को पूरी तरह स्वतंत्रता होगी। हम दल-बदल कानून को भी समाप्त कर देंगे, क्योंकि जब दलीय लोकतंत्र रहेगा ही नहीं, तो दल-बदल कानून का क्या औचित्य है?

इस तरह परिवार व्यवस्था से लेकर राष्ट्र व्यवस्था तक हम निर्दलीय लोकतंत्र बनाएंगे।