ध्रुव राठी विवाद: आस्था, अभिव्यक्ति और राजनीति
ध्रुव राठी एक वामपंथी यूट्यूबर माने जाते हैं। उन्हें विदेशों से भी लगातार प्रोत्साहन मिलता रहा है। यहाँ तक कि विदेश के लोग ध्रुव राठी को कोई बड़ा सम्मान देने की बात भी सोच रहे हैं। दूसरी ओर, ध्रुव राठी ने अपने स्वभाव के अनुसार राम, सीता, कृष्ण आदि पर इस तरह का आरोप लगाया कि वे मांसाहार और शराब का सेवन करते थे। ध्रुव राठी के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया है कि उनके इस प्रकार के कथन पर सरकार 15 दिनों के अंदर निर्णय करे।
इस तरह ध्रुव राठी का मामला धीरे-धीरे पेचीदा होता जा रहा है। यह बहुत पहले से जानकारी है कि ध्रुव राठी का संबंध अरविंद केजरीवाल से भी बहुत नज़दीक का है और अन्य विपक्षी नेता भी ध्रुव राठी के पक्ष में खड़े रहते हैं, लेकिन वर्तमान समय में ध्रुव राठी ने जो राम, कृष्ण और सीता के विषय में टिप्पणी की है, उस पर विपक्ष अभी तक चुप है।
इस तरह के अनर्गल आरोप लगाने वाले ध्रुव राठी अकेले पत्रकार नहीं हैं। रवीश कुमार तो इस मामले में बहुत लंबे समय से बदनाम रहे हैं। अन्य भी कई लोग ऐसे हैं जो सरकार की आलोचना करते-करते हिंदू धर्म की ही निंदा करने लगते हैं और इस प्रकार की निंदा को ही वे अपनी दुनिया भर में सफलता का मापदंड मानते हैं। यबात भी सही है कि इस प्रकार की अनर्गल टिप्पणियाँ ही दुनिया में उन्हें प्रसिद्धि भी देती हैं। लेकिन जिस तरह धीरे-धीरे भारत में वामपंथ बदनाम हो रहा है, उससे यह पता चलता है कि ध्रुव राठी, रवीश कुमार या अन्य वामपंथियों की दुकानदारी ज़्यादा दिन तक चलने वाली नहीं है।
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