आरोप, विवाद और धैर्य: चंपत राय के समर्थन में

मैं चंपत राय जी को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि कुत्ते लगातार कई दिनों से भोंकते रहे और चंपत राय जी ने कभी उनके सामने सर नहीं झुकाया। आज पूरी बात साफ हो गई और चंपत राय जी इस प्रतिष्ठा से बेदाग सिद्ध हो गए। लेकिन इस तरह का संकट झेलने वाले चंपत राय जी अकेले नहीं हैं। मैं भी जीवन भर इस प्रकार के भोंकने वालों को झेलता रहा हूं। मैंने तो कई बार कुत्तों को मरवाया भी है। फिर भी यह कभी-कभी भोंकते रहते हैं। ऐसे कुत्ते अगर नेता भी बन जाएं और साथ में मीडियाकर्मी भी, तब तो वह अपने को भगवान से भी ऊपर समझने लगते हैं। आमतौर पर लोग इससे डर जाते हैं। मुझे भी जीवन भर इस प्रकार के लोगों को झेलना पड़ा। कभी रोटी फेंककर, कभी डंडा मारकर। अभी-अभी एक सप्ताह पहले ही इसी तरह कुछ भोंक रहे थे। इन कुत्तों के भोंकने में कभी जलकेश्वर शब्द निकलता था, कभी भित्ति शब्द निकलता था, लेकिन मैंने रोटी नहीं डाली और यह अपने आप भोंकना बंद कर दिए। मैं चंपत राय जी को इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि आप इस प्रकार के लोगों से कभी डरे नहीं और मैं भी लगातार इस तरह की हिम्मत करता रहा हूं।