वर्तमान लोकतंत्र से सुधरे हुए लोकतंत्र की ओर
8 जुलाई प्रातःकालीन सत्र
हम सब लोग श्रेष्ठतम संभव के सिद्धांत पर कार्य करते हैं। इसका मतलब यह है कि हम न सिर्फ आदर्शवादी हैं और न सिर्फ व्यवहारिक। हम आदर्श और व्यवहार का संतुलन लेकर चलते हैं।
वर्तमान दुनिया में पहले राजतंत्र या तानाशाही थी। तानाशाही और राजतंत्र में बदलाव करके लोकतंत्र आया, लेकिन कई सौ वर्षों के बाद भी लोकतंत्र में किसी तरह का कोई सुधार नहीं हो सका, जबकि दुनिया में वर्तमान लोकतांत्रिक प्रणाली सफल नहीं हो पा रही है। हम न तो व्यवस्था स्थापित कर पा रहे हैं, न तानाशाही को समाप्त कर पा रहे हैं।
वर्तमान लोकतांत्रिक प्रणाली आदर्श और व्यवहार का एक संतुलित मार्ग सिद्ध नहीं हो सकी है। इसलिए अब यह विचार करने का समय आ गया है कि वर्तमान लोकतंत्र में ऐसा कौन-सा बदलाव या सुधार किया जाए, जो अधिक कारगर हो सके।
इस संबंध में हम सब लोग गंभीरता से चिंतन-मंथन कर रहे हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि हम दुनिया को एक सुधरा हुआ लोकतंत्र दे सकेंगे, जिसकी शुरुआत भारत से होगी।
यह चर्चा हम आज जारी रखेंगे।
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