कानून बढ़ते गए, भ्रष्टाचार भी बढ़ता गया
मेरा अपना यह अनुभव है। जो व्यवस्था भ्रष्ट होती है, वह नए-नए कानून बनाती है और वे कानून भ्रष्टाचार के अवसर पैदा करते हैं और फिर उन्हें रोकने के लिए नए कानून बनते हैं। इस तरह कानून और भ्रष्टाचार दोनों एकाकार हो जाते हैं। यही हाल वर्तमान में दिख रहा है। सारा देश जान गया है कि वर्तमान प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था भ्रष्ट है, फिर भी इस भ्रष्ट व्यवस्था को लगातार शक्तिशाली बनाया जा रहा है। आप जरा सोचिए कि नीट परीक्षा की जरूरत क्या थी? हर कॉलेज अपने हिसाब से परीक्षा लेता। कॉलेज के लिए फीस तय करने की जरूरत क्या थी? हर कॉलेज अपने अनुसार फीस लेता। लेकिन क्योंकि सरकार को भ्रष्टाचार करना है, तो इसलिए सारी परीक्षाओं को केंद्रित कर दिया, नौकरियों को केंद्रित कर दिया, कॉलेज की फीस को केंद्रित कर दिया, जिससे कि ऊपर के लेवल पर भी मनमाना भ्रष्टाचार हो सके। यह नीट परीक्षा भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करने के अतिरिक्त कुछ नहीं है। हर स्कूल को छूट दे दीजिए, हर कॉलेज को छूट दे दीजिए, हर मेडिकल कॉलेज को छूट दे दीजिए। वे अपने-अपने आधार पर लोगों का चयन करें और वे मनमानी फीस लें। सरकार सिर्फ अपने कॉलेज और अपने स्कूलों पर इस तरह के नियम-कानून बना सकती है। मुझे पूरा विश्वास है कि भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन देने के लिए ही नीट परीक्षा सरीखे अनेक कानून बनाए जा रहे हैं।
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