नई समाज व्यवस्था में राइट टू रिकॉल की मान्यता
8 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। हम नई समाज व्यवस्था में जो भी संविधान बनाएंगे, उस संविधान में हम यह प्रावधान अवश्य करेंगे। जो भी इकाई किसी व्यक्ति को पावर देगी, उस इकाई को राइट टू रिकॉल का भी पूरा अधिकार रहेगा। नियुक्तिकर्ता को नियंत्रण का अधिकार होना ही चाहिए। उसकी न कोई समय सीमा होती है, न कोई विशेष प्रावधान होते हैं। इसलिए हम राइट टू रिकॉल को एक संवैधानिक मान्यता देंगे। उसका कोई तरीका बनाया जा सकता है कि राइट टू रिकॉल सिद्धांत रूप से तो पूरी तरह सही है, लेकिन उसका कोई ऐसा व्यावहारिक तरीका बने, जिससे राइट टू रिकॉल सुविधाजनक हो। लेकिन यह हो ही नहीं सकता कि नियुक्तिकर्ता को नियुक्त पर नियंत्रण का कोई अधिकार ही नहीं होगा। वर्तमान संविधान को इसीलिए हम लोग गलत मानते हैं, अपर्याप्त मानते हैं, गलतियों का ढेर मानते हैं, क्योंकि इस संविधान में राइट टू रिकॉल जैसी एक साधारण व्यवस्था भी नहीं दी गई है। इसलिए हम राइट टू रिकॉल को अप्रत्यक्ष रूप से समाज का एक विशेष अधिकार मानते हैं। हम इसे संविधान में शामिल करेंगे।
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