विशेष अधिकारों के दुरुपयोग का खतरा
मैंने पहले भी कई बार लिखा है कि यदि महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, मीडिया वालों को विशेष अधिकार दिए जाएंगे, इसका दुरुपयोग होना निश्चित है। ऐसा संभव ही नहीं है कि विशेष अधिकारों का दुरुपयोग न हो। ऐसा ही एक उदाहरण अभी तरुण तेजपाल के मामले में देखने को मिला। तरुण तेजपाल एक प्रसिद्ध मीडिया कर्मी रहे हैं और उन्होंने अच्छे-अच्छे लोगों को भयभीत किया। वे स्टिंग ऑपरेशन के द्वारा किसी को भी किसी भी सीमा तक परेशान करने की क्षमता रखते थे। उन्हीं के कार्यालय में काम करने वाली एक महिला भी अपने को महिला होने के कारण विशेष अधिकार प्राप्त मानती थी। तरुण तेजपाल ने उस महिला की कुछ कमजोरी का लाभ उठाकर उसके साथ हल्की-फुल्की छेड़छाड़ की। उस महिला के इनकार करने को तरुण तेजपाल ने स्वीकृति मानकर छेड़छाड़ की थी और उस महिला ने भी सामान्य प्रतिवाद किया था। फिर दूसरे दिन भी ऐसी ही घटना हुई और महिला ने अस्वीकार किया, लेकिन विरोध नहीं किया। बात आई-गई हो गई। उस महिला ने अपने कुछ पुरुष मित्रों को यह बात बताई। अब तरुण तेजपाल से परेशान बड़े-बड़े नेताओं ने मिलकर उस महिला को पटा लिया। तेजपाल ने उस महिला से माफी माँगकर समझौता कर लिया। समझौता हो भी गया, लेकिन दूसरे लोगों ने मिलकर फिर से इस बात का बतंगड़ बना दिया। परिणाम हुआ उच्च न्यायालय से तरुण तेजपाल को 10 वर्ष का कारावास। दो बातें सच हैं। तरुण तेजपाल ने अपने को मीडिया कर्मी होने के विशेष अधिकार के आधार पर बहुत लोगों को परेशान किया था और ऐसे ही एक विशेष अधिकार प्राप्त महिला का उपयोग करके एक मामूली-सी गलती के लिए तरुण तेजपाल को 10 वर्ष के लिए जेल जाना पड़ा। मैं फिर से कहना चाहता हूँ कि हम समाज के लोग विशेष अधिकारों से सावधान रहें, अन्यथा किसी के साथ भी कोई भी इस प्रकार की दुर्घटना संभव है। कोई भी विशेष अधिकार प्राप्त दलित, आदिवासी, महिला, मीडिया कर्मी आपको परेशान कर सकता है और आप निर्दोष होते हुए भी कुछ नहीं कर सकते।
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