मोदी और राहुल गांधी के सामने बदलते भारत की चुनौती

भारत में विपक्षी दलों और उनके नेता राहुल गांधी को नए-नए प्रयोग करने में बहुत मजा आ रहा है। इसका राजनीतिक लाभ तो विपक्ष को नहीं मिल रहा है, लेकिन समाज को बहुत बड़ा नुकसान हो जा रहा है। विपक्ष ने मुसलमान को अपने साथ जोड़कर हिंदुओं के साथ कितना गलत व्यवहार किया, यह दुनिया जानती है। उसी का यह परिणाम हुआ कि देश में हिंदू-मुस्लिम का विभाजन हुआ और अब हिंदुओं को एकजुट होना पड़ा, जो अच्छा नहीं है।

बाद में विपक्ष ने महिला आंदोलन का एक नया नारा दे दिया था और सरकार ने महिलाओं को अधिक शक्ति देकर विपक्ष की हवा निकाल दी। स्पष्ट है, इससे भी सामाजिक एकता को बहुत नुकसान हुआ। अब विपक्ष ने युवा सशक्तीकरण का नारा देकर एक नई चाल खेली है। स्वाभाविक है कि सरकार युवाओं को अधिक ताकत देकर विपक्ष की इस योजना को असफल कर देगी, लेकिन इसका नुकसान पूरी समाज व्यवस्था को होगा।

सच्चाई यह है कि समाज व्यवस्था को विपक्ष ने धर्म और जाति के नाम पर बहुत नुकसान पहुँचा दिया है। अभी महिला और युवा के नाम पर भी नुकसान करने की जो योजना बनी है, वह बहुत घातक है। देश को हिंदू-मुसलमान, जातिवाद, महिला, युवा के रूप में नहीं, बल्कि समान अधिकार के रूप में समान नागरिक संहिता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

अब बात बहुत आगे बढ़ चुकी है और अब इस पवित्र कार्य के लिए विपक्ष को ही आगे आने की जरूरत है। सरकार के हाथ में कुछ नहीं है। अन्यथा समाज मजबूर होकर राजनीति-मुक्त भारत की आवाज उठाना शुरू कर देगा। मोदी जी तो हिमालय जा सकते हैं, राहुल गांधी कहाँ जाएँगे, उस पर सोचिए।