महंगाई की झूठी धारणा और वास्तविकता

16 सितंबर प्रातःकालीन सत्र। हम ऐसा अनुभव कर रहे हैं कि भारत में विदेशों की झूठी मान्यताएँ बहुत तेजी से फैल रही हैं और सत्य के समान स्थापित हो रही हैं। ऐसी ही मान्यताओं में महंगाई शब्द भी एक बहुत बड़ा झूठ है, जो भारत के हर एक आदमी को सत्य के समान दिखाई दे रहा है। हम लोगों ने रिसर्च किया है और पाया है कि स्वतंत्रता के बाद लगातार भारत में क्रय शक्ति की तुलना में उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्य कम होते जा रहे हैं, फिर भी जानबूझकर पूंजीपति और बुद्धिजीवी सरकारों के साथ और मीडिया के साथ मिलकर पूरे समाज में महंगाई का हल्ला कर रहे हैं, जिससे आर्थिक विषमता और श्रम शोषण पर से आम समाज का ध्यान हटाया जा सके। हम अच्छी तरह देख रहे हैं कि लोगों का जीवन स्तर भी सुधर रहा है, क्रय शक्ति भी तेजी से बढ़ रही है, श्रम मूल्य भी बढ़ रहा है। इसके बाद भी उपभोक्ता वस्तुओं को सस्ता रखने के लिए आयात का सहारा लिया जा रहा है। चीन भारत को मनमाना निर्यात कर रहा है और भारत चीन से आयात कर रहा है, क्योंकि भारत उपभोक्ता देश बन गया है और चीन उत्पादक देश बन गया है। हम चाहते हैं कि सत्य समाज के सामने आए, इसलिए नई व्यवस्था में हम महंगाई को प्राथमिकता देंगे। हम देश का उत्पादन बढ़ाएंगे, उपभोग घटाएंगे, निर्यात बढ़ाएंगे, आयात कम करेंगे, आत्मनिर्भर भारत बनाएंगे, भिखारी भारत नहीं। इसलिए हम महंगाई की नीति में आमूलचूल परिवर्तन करने की योजना रखते हैं।