श्रद्धा और तर्क का संतुलन: ज्ञान यज्ञ परिवार की वैचारिक दिशा

23 फरवरी, प्रातःकालीन सत्र

माँ संस्थान के पाँच दिवसीय शिविर में हम तीन संस्थानों पर चर्चा कर चुके हैं। इनमें से ज्ञान यज्ञ परिवार का उद्देश्य वैचारिक संतुलन पर आधारित हिंदुत्व की एक प्रयोगशाला का निर्माण करना है। इस प्रयोगशाला के माध्यम से हम समाज में जन-जागृति लाने का प्रयास करते हैं, ताकि शराफ़त से आगे बढ़कर समाज समझदारी की दिशा में अग्रसर हो सके।

हम व्यक्ति के स्वभाव में उत्पन्न हिंसा और स्वार्थ पर नियंत्रण की योजनाएँ भी प्रस्तुत करते हैं। साथ ही हम यह स्पष्ट करते हैं कि श्रद्धा और तर्क के बीच संतुलन आवश्यक है। अंध-श्रद्धा और अंध-तर्क—दोनों ही घातक होते हैं। दुर्भाग्यवश, वर्तमान समाज में इन दोनों प्रवृत्तियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

हमारा मानना है कि कुछ साम्यवादी विचारधाराएँ तर्क के पीछे इस हद तक चली जाती हैं कि उनमें श्रद्धा का स्थान लगभग शून्य हो जाता है। दूसरी ओर, कुछ सावरकरवादी धारा के लोग श्रद्धा के आग्रह में तर्क की उपेक्षा कर देते हैं। ये दोनों ही स्थितियाँ अतिवादी हैं और संतुलन से दूर ले जाती हैं।

ज्ञान यज्ञ परिवार का प्रयास समाज को यह समझाना है कि श्रद्धा और तर्क के बीच संतुलन ही स्वस्थ विचार का आधार है। वैचारिक कटुता और निरंतर विरोध की प्रवृत्ति समाज को आगे नहीं बढ़ाती। किसी भी विचारधारा का उद्देश्य केवल दूसरे की निंदा करना नहीं, बल्कि सकारात्मक और रचनात्मक कार्य करना होना चाहिए।

इसलिए हमें हर प्रकार के अतिवाद से बचना होगा, क्योंकि अतिवाद अंततः समाज के लिए घातक सिद्ध होता है। संतुलन, संवाद और सकारात्मक दृष्टि ही हमारा मार्ग है—यही आज के सत्र का संदेश है।