प्रधानमंत्री पद की राजनीति और विभिन्न वैचारिक योजनाएँ

भारत में वैसे तो कई व्यक्तियों ने प्रधानमंत्री बनने के लिए प्रयास किए, लेकिन तीन व्यक्तियों के प्रयास ऐसे माने जा सकते हैं जिन्हें समाज के लिए हानिकारक बताया गया। उन तीन व्यक्तियों में पंडित नेहरू, भीमराव अंबेडकर और दिग्विजय सिंह का नाम लिया जाता है।

पंडित नेहरू के बारे में यह कहा जाता है कि उनके मन में यह सपना था कि लंबे समय के बाद भारत में मुसलमानों की आबादी बहुमत में आ जाए और उनके परिवार का व्यक्ति लगातार प्रधानमंत्री बनता रहे। उनके पूरे कार्यकाल में जो नीतियाँ और व्यवहार दिखाई दिए, उनके आधार पर कुछ लोगों का यह मानना है कि हिंदुओं को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया गया और मुसलमानों को अपनी आबादी और मनोबल बढ़ाने के अवसर मिले। इसी कारण यह धारणा बनती है कि पंडित नेहरू भारत को एक मुस्लिम-बहुल देश बनाना चाहते थे।

दूसरी ओर भीमराव अंबेडकर की योजना अलग मानी जाती है। उनके बारे में यह कहा जाता है कि वे चाहते थे कि आदिवासी, दलित और महिलाएँ मिलकर देश में एक बड़ा सामाजिक बहुमत बना लें। यदि ऐसा बहुमत बन जाता, तो वे नेहरू की योजना को पलट सकते थे और स्वयं प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में आ सकते थे।

बाद में दिग्विजय सिंह के बारे में भी यह कहा जाता है कि उन्होंने ऐसी कोशिश की कि यदि भारत में नक्सलवादियों की सरकार बन जाए तो वे स्वयं उसके प्रधानमंत्री बन सकते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उनकी कार्यक्रम प्रणाली में ऐसे संकेत मिलते हैं कि प्रसिद्ध गांधीवादी नेता ब्रह्मदेव शर्मा के साथ मिलकर इस प्रकार की योजना बनाई गई थी। इसी कारण यह आरोप भी लगाया जाता है कि दिग्विजय सिंह ने नक्सलवाद को प्रोत्साहित किया।

हालाँकि, इन सभी योजनाओं को वर्तमान भारत में सफल नहीं माना जाता। कहा जाता है कि संघ परिवार ने एकजुट होकर नेहरू की कथित योजना का विरोध किया। अंबेडकर के निधन के बाद उनकी योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसी प्रकार दिग्विजय सिंह की योजना को भी वर्तमान सरकार ने पूरी तरह असफल कर दिया।

इस प्रकार यह माना जाता है कि तिकड़म के माध्यम से प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वालों की योजनाएँ अब लगभग असफल हो चुकी हैं। भविष्य में भारत का प्रधानमंत्री वही बन सकेगा जो समान नागरिक संहिता लाने का प्रयास करेगा, प्रत्येक व्यक्ति को जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर देखेगा और जिसे भारत की जनता का व्यापक विश्वास प्राप्त होगा।