नई समाज व्यवस्था का प्रारूप

31 मार्च प्रातःकालीन सत्र। हम दुनिया की नई समाज व्यवस्था का प्रारूप बना रहे हैं और भारत से इसकी शुरुआत कर रहे हैं। इस नई समाज व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को एक स्वतंत्र इकाई माना जाएगा। व्यक्ति स्वेच्छा से एक साथ जुड़कर परिवार बनाएंगे। परिवारों का समूह ग्राम सभा माना जाएगा और इसी तरह जिला, प्रदेश, राष्ट्र तथा समाज अलग-अलग इकाइयाँ होंगी। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी स्वतंत्रता होगी कि वह कोई भी धर्म, जाति, लिंग, भाषा मान सकता है, लेकिन हम सामाजिक व्यवस्था में धर्म, जाति, भाषा के आधार पर संगठन को स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि हमारा यह मानना है कि महिला, पुरुष, युवा, वृद्ध, आदिवासी, दलित, सवर्ण, अवर्ण या अन्य जाति-भेद सामाजिक व्यवस्था में बाधक हैं, साधक नहीं। इसलिए हम इस व्यवस्था को पूरी तरह अस्वीकार करते हैं। हम महिला-पुरुष, आदिवासी-गैर आदिवासी का भेद स्वीकार नहीं करेंगे। व्यक्ति एक इकाई होगा और व्यक्ति-व्यक्ति में कोई आधिकारिक भेदभाव नहीं होगा। व्यक्ति के दो ही प्रकार होंगे—अच्छे और बुरे। इसके अतिरिक्त हम कोई व्यक्ति-भेदभाव नहीं मानेंगे।