सरकार परिवर्तन से व्यवस्था परिवर्तन की ओर

लेकिन यह बात भी गंभीरता से सोचना होगा कि वर्तमान समय में हमने सिर्फ सरकार बदली है, व्यवस्था नहीं। क्योंकि व्यवस्था तो तब बदलेगी, जब सरकार को दो-तिहाई बहुमत मिलेगा, जब सरकार को संविधान संशोधन का अधिकार मिलेगा। वर्तमान समय में व्यवस्था तो पुरानी ही चल रही है, सिर्फ सरकार बदली है।

दूसरी बात यह है कि हम लोगों ने पिछली सरकार की बुराइयों में से एक बुराई, नक्सलवाद, को खत्म किया है। यह एक बहुत बड़ी बुराई थी और उसको समाप्त करना अभूतपूर्व सफलता मानी जाएगी। दूसरी बुराई भी हम लगभग समाप्त कर चुके हैं और वह बुराई थी सांप्रदायिकता की। मुसलमानों को विशेष अधिकार देकर सरकार जिस तरह सांप्रदायिकता बढ़ा रही थी, उस सांप्रदायिकता को हम अब समाप्त कर रहे हैं। इस तरह सांप्रदायिकता का भी जल्दी ही निपटारा हो जाएगा।

अब भारत सरकार धीरे-धीरे जातिवाद पर आक्रमण कर रही है। अगले दो-तीन वर्षों में जातिवाद पर भी नियंत्रण पा लिया जाएगा। उसके बाद चौथे कार्य के रूप में कोई नया विषय लिया जाएगा। तब तक यह भी संभव है कि सरकार को दो-तिहाई बहुमत मिल जाए और व्यवस्था परिवर्तन की संभावनाएँ आगे बढ़ जाएँ।

अभी तो सिर्फ संभावना ही है। अभी इस विषय में कुछ नहीं कहा जा सकता कि भविष्य में क्या होगा। लेकिन यह बात साफ है कि सरकार बिल्कुल ठीक दिशा में कार्य कर रही है। अब सांप्रदायिकता के समाप्त होते ही हम जातिवाद पर आक्रमण शुरू करेंगे।

70 वर्षों में हम लोगों ने जो व्यवस्था परिवर्तन का सपना दिखाया था, उस जिम्मेदारी को हम स्वीकार करते हैं और उससे पीछे नहीं हटेंगे।