नई समाज व्यवस्था में सांस्कृतिक हिंदुत्व की भूमिका
31 में प्रातःकालीन सत्र
हम नई सामाजिक व्यवस्था में हिंदुत्व को दुनिया भर में एक संस्कृति के रूप में मान्यता दिलवाने का प्रयास करेंगे। हम ऐसी नीतियाँ बनाएंगे कि दुनिया अपने आप इन नीतियों पर चलने लगेगी। क्योंकि हिंदुत्व सिर्फ आस्था पर निर्भर नहीं है, बल्कि विज्ञान पर भी निर्भर है।
हम हिंदुओं का कोई संगठन नहीं बनाएंगे। हम हिंदुत्व को एक संस्था के रूप में विकसित करेंगे। हम सारी दुनिया के सामने हिंदुत्व का विवेकानंद वाला चेहरा प्रस्तुत करेंगे। हम दुनिया में यह विचार देंगे कि हिंदुत्व मानवतावादी विचारधारा है, संतुलनवादी विचारधारा है।
हम हिंदुत्व की लाखों वर्षों से बनी हुई धारणा को आगे बढ़ाएंगे। अल्पकाल के लिए विशेष परिस्थितियों में हमने हिंदुत्व का वह संगठनात्मक स्वरूप प्रस्तुत किया, जो आवश्यक था। लेकिन अब बीमारी खत्म हो रही है और अब दवा की जरूरत नहीं है।
हम इस्लाम से सतर्क रहेंगे, लेकिन गलती नहीं करेंगे।
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