राष्ट्र, राज्य और समाज: सर्वोच्चता का वास्तविक केंद्र क...
समाज में राष्ट्र भावना अत्यंत प्रबल होती है। राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति समाज में स्वाभाविक सम्मान रहता है, जब...
समाज में राष्ट्र भावना अत्यंत प्रबल होती है। राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति समाज में स्वाभाविक सम्मान रहता है, जब...
11 मार्च, प्रातःकालीन सत्र राज्य समाज को गुलाम बनाकर रखने के लिए तरह-तरह के नाटक करता है। उन नाटकों में एक मह...
समाज को गुलाम बनाकर रखने के लिए राज्य किस प्रकार की योजनाएँ बनाता है, इस विषय पर हम लगातार चर्चा कर रहे हैं। इ...
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य की यह मजबूरी हो जाती है कि वह जनहित की अपेक्षा लोकप्रियता को अध...
मैं पिछले पाँच दिनों तक(12-02-2026 से 16-02-2026) रामानुजगंज शहर में माँ संस्थान द्वारा संचालित “विचार म...
8 फरवरी प्रातःकालीन सत्रहमारी संपूर्ण समाज व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण आधार हमारी परिवार व्यवस्था है। परिवार व...
10 जनवरी प्रातःकालीन सत्रहम पिछले कई दिनों से समाज को टुकड़ों में बाँटने वाली वैश्विक योजनाओं पर चर्चा कर रहे ...
1 जनवरी 2026 : प्रातःकालीन सत्रराज्य, राष्ट्र और समाज : पुनर्परिभाषा की आवश्यकताकल रात्रि 7:30 बजे से 9:30 बजे...
मैं आज प्रातःकाल से समाज-सशक्तिकरण के प्रश्न पर विचार कर रहा हूँ। हाल ही में नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्ट...
मैं नई समाज-व्यवस्था में आपसी सहमति के आधार पर फ्री सेक्स का पक्षधर हूँ। महिला ...
हम केवल भारत की समस्याओं पर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की चुनौतियों पर भी गंभीरतापूर्वक चिंतन कर रहे हैं। मा...
30 जून प्रातः कालीन सत्र समाज व्यवस्था का एक मौलिक सिद्धांत है कि समाज, मार्गदर्शकों और रक्षकों की संयुक्त जिम...
सहजीवन के प्रशिक्षण बिना हिंसा और स्वार्थ पर अंकुश संभव नहीं:  ...
पश्चिम के लोकतांत्रिक देशो में व्यक्ति और सरकार को मिलाकर व्यवस्था बनती है। सरकार को ही समाज मान लिया जाता है।...