व्यक्ति और समाज के संबंध इतने जटिल और उलझे हुए हैं
दुनिया में व्यक्ति और समाज के संबंध इतने जटिल और उलझे हुए हैं कि उन्हें पूरी तरह सुलझाकर समझाना अत्यंत कठिन का...
दुनिया में व्यक्ति और समाज के संबंध इतने जटिल और उलझे हुए हैं कि उन्हें पूरी तरह सुलझाकर समझाना अत्यंत कठिन का...
18 दिसंबर : प्रातःकालीन सत्रकल रात 8:00 बजे मैं माँ संस्थान द्वारा आयोजित भगवान बुद्ध पर आधारित एक स्वतंत्र चर...
संसद सदस्यों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दलबदल कानून मनीष तिवारी को कांग्रेस पार्टी के एक समझदार और नपे-तु...
आज अंडमान-निकोबार में अमित शाह जी और मोहन भागवत जी द्वारा वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया और उनकी प्र...
मैं छत्तीसगढ़ में रहता हूं लेकिन मेरे घर से बिहार सिर्फ 100 फुट की दूरी पर ही है अर्था...
10 नवंबर प्रातः कालीन सत्र स्वतंत्रता के पहले भारत में दो विचारधाराए थी एक गांधी विचारधारा दूसरी नेहरू विचारधा...
25 अक्टूबर — प्रातःकालीन सत्र वर्तमान भारत में खेल, राजनीति और मीडिया — तीनों ही ...
आज मैंने प्रज्ञा ठाकुर के उस सुझाव की निन्दा की थी जिसमें किसी धर्म विरोधी के साथ जाने वाली परिवार की लड़की के...
विषय: नई समाज व्यवस्था पर चर्चा हम आज इस विषय पर विचार कर रहे हैं कि गांधी और संघ — दोनों के मार्गों मे...
जिस प्रकार किसी भले और सीधे-सादे कमजोर व्यक्ति को, बिना किसी गलती के भी, चालाक लोग डाँट देते हैं, वैसा ही हाल ...
6 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। हम सिर्फ समाजशास्त्री नहीं हम समाज विज्ञान पर भी रिसर्च कर रहे हैं। हम इस बात को अच...
स्वतंत्रता के बाद भारत ने अंग्रेजी शासन से मुक्ति तो पा ली, किंतु नेहरू के नेतृत्व में देश एक नई वैचार...
3 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। वर्तमान दुनिया में एक बहस बढी हुई है की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है या एकरूपता। भारत म...
नई राजनीतिक व्यवस्था में नकद सब्सिडी प्रस्ताव 6 जुलाई 2025, प्रातःकालीन सत्र में हम वर्तमान राजनीतिक और सामाज...
प्रत्येक व्यक्ति की दो भूमिकाए होती है। 1. व्यक्ति के रूप मे 2. समाज के अंग के रूप मे। दोनो भूमिकाए बिल्कुल ...