प्रमाणित हो चुकी है कि समाज के मार्गदर्शन और सुरक्षा का दायित्व धर्म-व्यवस्था और राज्य-व्यवस्था को सौंपा गया था। किंतु विडंबना यह है-

अब यह बात पूरी दुनिया में प्रमाणित हो चुकी है कि समाज के मार्गदर्शन और सुरक्षा का दायित्व धर्म-व्यवस्था और राज्य-व्यवस्था को सौंपा गया था। किंतु विडंबना यह है कि धर्म और राजनीति के नाम पर जितने अपराध हुए हैं या हो रहे हैं, वे सामान्य अपराधियों द्वारा किए गए अपराधों की तुलना में कहीं अधिक हैं।
जिन संस्थाओं को हमने अपराधों पर नियंत्रण के लिए स्थापित किया था, उन्हीं संस्थाओं के आपसी संघर्ष और स्वार्थपूर्ण टकराव आज समाज के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुके हैं। परिणामस्वरूप यह आवश्यक हो गया है कि समाज धर्म-व्यवस्था और राजनीतिक-व्यवस्था—दोनों पर पुनर्विचार करे।
हम सभी ने मिलकर इस विषय पर गंभीर चिंतन प्रारंभ किया है और प्रारंभिक निष्कर्ष अत्यंत सकारात्मक तथा आशाजनक हैं। निकट भविष्य में हम विश्व के समक्ष कुछ ऐसे ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे, जो धर्म-व्यवस्था और राज्य-व्यवस्था—दोनों को अपनी दिशा और कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य करेंगे।
अब हाथ पर हाथ धरे बैठने का समय नहीं है। अब धर्म और राजनीति के साथ मिलकर लाभ उठाने का समय भी नहीं है। अब समय आ गया है कि समाज इन दोनों व्यवस्थाओं पर नैतिक, वैचारिक और सामाजिक नियंत्रण स्थापित करे।
इसलिए हम आप सभी से आह्वान करते हैं कि इस गंभीर विषय पर गहन चिंतन करें, ठोस निष्कर्ष निकालें और समाज के समक्ष ऐसे प्रस्ताव रखें जो मानवता, न्याय और शांति के हित में हों।