सबसे गंदा काम पिछली सरकार ने यह किया था कि नरेगा को बाद में मनरेगा बना दिया।

पिछला वर्ष अब समाप्त हो रहा है। सरकार ने एक बहुत ही अच्छा कार्य किया है कि उसने मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह एक साफ-सुथरी नई योजना प्रस्तुत की। सबसे गंदा काम पिछली सरकार ने यह किया था कि नरेगा को बाद में मनरेगा बना दिया। नरेगा एक बहुत अच्छी योजना थी, लेकिन उसमें नेहरू परिवार ने जानबूझकर “गांधी” शब्द जोड़ा। इसका कारण यह था कि वे स्वयं को गांधी परिवार का ही मानते हैं और उनका विश्वास था कि “गांधी” शब्द के माध्यम से अब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की पहचान बनेगी। पुराने गांधी तो अब नहीं रहे, इसलिए गांधी शब्द जोड़ा गया।
दूसरा बड़ा नुकसान यह हुआ कि नरेगा के मूल उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया गया। नरेगा का मुख्य उद्देश्य था पिछड़े क्षेत्रों के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना, लेकिन एक षड्यंत्र के तहत नरेगा की मजदूरी अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग कर दी गई। इससे पिछड़े और विकसित क्षेत्रों के बीच का अंतर और अधिक बढ़ता चला गया। यह स्पष्ट रूप से एक सोचा-समझा षड्यंत्र था।
नई योजना में इस षड्यंत्र से बचने का प्रयास किया गया है। अब यदि कोई प्रदेश मजदूरी बढ़ाता है, तो उसे उसका आर्थिक हिस्सा भी स्वयं देना पड़ेगा। यह एक बहुत ही उचित निर्णय है। अब विकसित क्षेत्रों में इन योजनाओं को नहीं चलाया जाएगा, बल्कि केवल पिछड़े क्षेत्रों में ही रोजगार दिया जाएगा। इस प्रकार नरेगा को मनरेगा में बदलकर जो षड्यंत्र किया गया था, उससे नई योजना में बचाव किया गया है। गांधी शब्द को बाहर कर दिया गया है।
मैं तो इस बात का भी पक्षधर हूँ कि “गांधी” शब्द को सरकार अब आरक्षित घोषित कर दे और जो व्यक्ति गांधी परिवार से संबंधित नहीं है, वह अपने नाम के साथ गांधी लिखने की गलती न करे।