राजस्थान में तीन दिन पहले एक युवा साध्वी की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।

राजस्थान में तीन दिन पहले एक युवा साध्वी की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। यह घटना आत्महत्या थी या हत्या—यह मेरी चर्चा का विषय नहीं है। लेकिन इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण कड़ी यह जुड़ी हुई है कि उस साध्वी के अपने गुरु के साथ अवैध शारीरिक संबंध होने की संभावना बताई जा रही है। इस प्रकार की कुछ अफ़वाहें पहले भी सामने आई थीं, जिनका साध्वी ने कड़ा प्रतिरोध किया था।
मेरे विचार से इस मामले में साध्वी या उनके गुरु उतने दोषी नहीं हैं, जितनी हमारी सामाजिक व्यवस्था दोषपूर्ण है। मेरा अनुभव है कि बड़ी संख्या में साध्वी और धर्मगुरुओं के बीच इस प्रकार के शारीरिक संबंध पाए जाते हैं। यह कोई अपवाद नहीं है। यदि ऐसे संबंध थे भी, तो उन्हें लेकर बवंडर खड़ा करने वाले लोग गलत थे और उस बवंडर से प्रभावित होने वाले लोग भी गलत थे।
इस तरह की अफ़वाहों को फैलाने वाले सामान्यतः ब्लैकमेलिंग की नीयत से ही ऐसा करते हैं, और साध्वी के इस मामले में भी यही बात सामने आ रही है। हम पहले भी राम रहीम, आसाराम और अन्य कई मामलों में इसी प्रकार की सामाजिक भूलें कर चुके हैं और दुर्भाग्यवश भविष्य में भी इनसे सुधार नहीं कर पा रहे हैं।
महिला और पुरुष की इस प्रकार की निकटता में अपवाद स्वरूप ही कोई व्यक्ति ब्रह्मचारी रह पाता है, अन्यथा सामान्यतः ऐसी मानवीय मजबूरियाँ होती ही हैं। इसलिए मेरा सुझाव है कि समाज को इस विषय में अपना दृष्टिकोण सुधारना चाहिए। कुछ अपवादस्वरूप उच्च चरित्रवान व्यक्तियों की अवास्तविक अपेक्षाओं के कारण समाज में इस प्रकार की दुर्घटनाएँ होना स्वाभाविक है।
जो प्राकृतिक आवश्यकता है, उसे बलपूर्वक रोके जाने की अपेक्षा करना मूर्खता के अतिरिक्त कुछ नहीं है। मेरा मानना है कि ऐसी अपेक्षाएँ रखने वाले या तो धूर्त ब्लैकमेलर होते हैं या फिर मूर्ख—समझदार नहीं। सत्य को स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और परिस्थितियों के अनुरूप सत्य-आधारित सामाजिक नियम और कानून बनाए जाने चाहिए।