“शराफत छोड़ो, समझदार बनो” — सामाजिक जागरण का नया अभियान
हम पाँच दिनों के माँ संस्थान सम्मेलन की चर्चा कर रहे हैं। मैं पहले ही स्पष्ट कर चुका हूँ कि माँ संस्थान केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं करता, बल्कि उनके कारणों की खोज करता है, समाधान प्रस्तुत करता है और उन समाधानों के आधार पर ठोस क्रियान्वयन की भी शुरुआत करता है। इस पाँच दिवसीय शिविर में परिवार से लेकर विश्व स्तर तक संविधान के अभाव को विशेष महत्व दिया गया और इस दिशा में कार्य करने के लिए एक संविधान सभा की पहल की गई, जो समाज का मार्गदर्शन करेगी। साथ ही यह भी निष्कर्ष सामने आया कि वर्तमान समाज अनेक कुरीतियों में उलझ गया है, जिनका लाभ उठाकर धूर्त तत्व समाज को भ्रमित कर रहे हैं। इसलिए आवश्यक है कि समाज इन बुराइयों पर गंभीर चर्चा करे, उनसे बचने का प्रयास करे और विशेष रूप से सजग रहे कि समाज-विरोधी तत्व इनका दुरुपयोग न कर सकें। इसी उद्देश्य से माँ संस्थान ने ज्ञान यज्ञ परिवार का कार्य प्रारंभ किया और “शराफत छोड़ो, समझदार बनो” का नारा दिया। तीसरा महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि समाज में विचारकों का प्रभाव कम हो गया है और प्रचारकों का प्रभाव बढ़ गया है। राजनीति और धन, विचारों की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक स्वतंत्र विचार सभा की योजना बनाई गई, जिसका नेतृत्व बृजेश राय जी को सौंपा गया है। प्रतिदिन रात्रि 7:30 बजे से 9:00 बजे तक ज़ूम के माध्यम से चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें नए स्वतंत्र विचारकों को जोड़ा जाएगा और विचार मंथन की प्रक्रिया को गति दी जाएगी। इन तीनों योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एक सामूहिक नीति भी बनाई गई है।
हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि विश्व की समस्याओं के समाधान की शुरुआत भारत से होगी और भारत में इसकी शुरुआत माँ संस्थान के माध्यम से होगी। वर्तमान में किसी अन्य संस्थान के पास इस प्रकार की समग्र योजना या प्रारंभिक कार्यप्रणाली उपलब्ध नहीं है। इसी उद्देश्य से तीन अलग-अलग संस्थाओं का गठन किया गया है—एक संविधान मंथन के लिए, दूसरी सामाजिक सुधार के लिए और तीसरी स्वतंत्र विचार मंथन के विस्तार के लिए। इन तीनों संस्थाओं को सशक्त करने के लिए एक चौथी संस्था का गठन किया गया है, जिसे ज्ञान केंद्र कहा गया है। पूरे भारत के गाँव-गाँव तक ज्ञान केंद्रों के विस्तार की योजना बनाई गई है। ये ज्ञान केंद्र तीनों संस्थाओं को सशक्त करेंगे, जबकि माँ संस्थान इन चारों संस्थाओं के बीच संतुलन बनाए रखेगा। सभी संस्थाएँ अपने-अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेंगी और माँ संस्थान किसी भी संस्था के आंतरिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। इस प्रकार पाँच दिनों में विश्व समाज की विविध समस्याओं के समाधान का एक समग्र प्रारूप प्रस्तुत किया गया है और इस दिशा में कार्य निरंतर जारी है। अब तक देशभर में लगभग 50 ज्ञान केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। विचार मंथन का कार्य पिछले दो वर्षों से निरंतर चल रहा है, संविधान सभा में लगभग 55 सदस्य जुड़ चुके हैं और ज्ञान यज्ञ परिवार भी सक्रिय हो चुका है। चारों संस्थाएँ अपने-अपने क्षेत्र में प्रगति कर रही हैं। पाँच दिवसीय शिविर में सभी संस्थाओं ने अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। व्यक्तिगत रूप से मैं इस शिविर की संपूर्ण योजना से अत्यंत संतुष्ट हूँ। मुझे विश्वास है कि निकट भविष्य में हम विश्व की समस्याओं के समाधान के नए और प्रभावी मार्ग समाज के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। आज की चर्चा के साथ ही इस पाँच दिवसीय शिविर की समीक्षा समाप्त की जाती है।
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