ममता के बाद विपक्ष का एकमात्र केंद्र: सोनिया गांधी
ममता बनर्जी के पतन के बाद अब तो भारतीय राजनीति में विपक्ष के नाम पर सिर्फ सोनिया गांधी बची हैं। अन्य सारे विपक्षी नेता अब सोनिया गांधी के इर्द-गिर्द ही घूम रहे हैं। राहुल गांधी तो बेचारे सोनिया गांधी के आदेश-पालक मात्र हैं, और कुछ नहीं। न तो राहुल में योग्यता है और न ही क्षमता।
लेकिन अन्य विपक्षी नेता भी अब सोनिया पर निर्भर हो गए हैं और सोनिया की वफादारी पूरी तरह विदेशों में है। सोनिया को भारत के विकास, भारत की संस्कृति या भारत के सम्मान से कोई लेना-देना नहीं है।
आप सब जानते हैं कि सोनिया गांधी के प्रतिनिधि राहुल गांधी भारत के सभी उद्योगपतियों को गाली देते हैं, क्योंकि उन्हें गरीब और वंचित वर्ग पर ही विश्वास है। राहुल गांधी हमेशा मुस्लिम देशों के साथ खड़े रहते हैं, क्योंकि उन्हें भारत के हिंदुओं पर कोई विश्वास नहीं है। राहुल गांधी रूस और चीन के साथ खड़े रहते हैं, क्योंकि उन्हें भारत के लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है। यहां तक कि राहुल गांधी उत्तर कोरिया के मामले में भी सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रखते हैं।
राहुल गांधी को उस हर विचारधारा से प्रेम है जो भारत के विरुद्ध है। अंतर केवल इतना है कि सोनिया गांधी इस तरह मूर्खतापूर्ण बातें खुलकर नहीं बोलतीं, जबकि राहुल गांधी अपनी बात स्पष्ट कर देते हैं।
यही कारण है कि राहुल गांधी दिन-रात भारत के विरुद्ध बोलते रहते हैं, क्योंकि सोनिया गांधी भी यही चाहती हैं।
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