ट्रंप, जिनपिंग, राहुल गांधी और केजरीवाल: नेतृत्व की चार प्रवृत्तियाँ
अभी हम बात करेंगे ट्रंप, शी जिनपिंग, राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल की तुलना करते हुए। दुनिया में आमतौर पर दो ही तरह के लोग होते हैं—एक शरीफ और एक चालाक। अगर शरीफ लोग कहीं पावरफुल हो जाते हैं तो वे मूर्ख भी हो जाते हैं। वे घमंडी होते हैं, किसी की बात सुनते नहीं, दिनभर बोलते रहते हैं, कुछ भी बोलते रहते हैं, उनका व्यवहार अप्रत्याशित होता है। आप देख सकते हैं कि ट्रंप में ऐसे सारे दुर्गुण मौजूद हैं। अमेरिका का जितना नुकसान ट्रंप ने किया है, उतना किसी और ने नहीं किया। ईरान से पराजित होना कोई साधारण घटना नहीं है।
राहुल गांधी ने भी जितना नुकसान किया है, उतना किसी ने नहीं किया। ट्रंप पर वृद्धावस्था का प्रभाव है और राहुल गांधी पर बचपन का। राहुल गांधी अपनी माँ या बहन से जिस प्रकार गले मिलते हैं, वह उनके बचपन या मूर्खता का ही प्रमाण है।
दूसरी ओर हम चर्चा करें जिनपिंग और अरविंद केजरीवाल की। ये लोग अति चालाक हैं, जिन्हें हम धूर्त भी कह सकते हैं। गुप्त योजनाएँ बनाते हैं, बहुत मीठा बोलते हैं, व्यवहार कुशल होते हैं, अनावश्यक टकराते नहीं हैं। आप देख लीजिए, चीन किसी युद्ध में नहीं फँसता और अरविंद केजरीवाल भी हर जगह बचे ही रहते हैं। इन दोनों की चालाकी आसानी से कोई पकड़ नहीं पाता है। दोनों ही अपनी जगह सफल हैं।
दुनिया यह तय नहीं कर पा रही है कि शरीफ और चालाक में से किसे अपना नेता चुने, क्योंकि समझदार लोग बहुत कम होते हैं और समझदार लोगों को ये शरीफ और चालाक दोनों मिलकर असफल कर देते हैं। हमने देखा है कि अटल बिहारी वाजपेयी सरीखे समझदार व्यक्ति को संघ ने असफल कर दिया। मनमोहन सिंह सरीखे समझदार प्रधानमंत्री को शरीफ राहुल ने असफल कर दिया। नरेंद्र मोदी पर भी संघ की बुरी नजर थी, लेकिन मोहन भागवत जैसे समझदार व्यक्ति ने नरेंद्र मोदी को संभाल लिया।
आज ट्रंप और जिनपिंग दोनों की तुलना में नरेंद्र मोदी अधिक सफल हो रहे हैं। स्वाभाविक है कि समझदार को शरीफ का समर्थन चाहिए ही। अब ट्रंप से अमेरिका और राहुल गांधी से भारत मुक्ति चाहता है, लेकिन अरविंद केजरीवाल और जिनपिंग से भी सावधान रहना चाहता है।
Comments