भारत देश और राज्य है, अभी राष्ट्र नहीं: राष्ट्र निर्माण की नई परिभाषा
17 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। हमारी अपनी परिभाषा में भारत एक देश है, राज्य है, राष्ट्र नहीं। हम ऐसा मानते हैं कि देश और राज्य की एक भौगोलिक सीमा होती है, एक संवैधानिक शासन व्यवस्था होती है, एक आबादी होती है। यह तीनों बातें भारत में हैं। आबादी भी 140 करोड़ है, क्षेत्रफल भी बहुत बड़ा है, संप्रभु संवैधानिक शासन भी है, लेकिन संवैधानिक समाज व्यवस्था भारत में नहीं है। भारत की समाज व्यवस्था राज्य के नियंत्रण में है, इसलिए हम भारत को राष्ट्र नहीं कह सकते।
अब हम भारत को राष्ट्र बनाना चाहते हैं। इसका अर्थ यह है कि भारत संवैधानिक शासन व्यवस्था के साथ-साथ एक संवैधानिक समाज व्यवस्था के अंतर्गत भी कार्य करेगा। अर्थात भारत में शासन व्यवस्था अलग होगी, समाज व्यवस्था अलग होगी और यह दोनों व्यवस्थाएं किसी समाज-निर्मित संविधान के अंतर्गत कार्य करेंगी। संविधान दोनों का मिलाकर एक भी हो सकता है और अलग-अलग भी हो सकता है। संविधान निर्माण में समाज की प्रमुख भूमिका होगी।
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