माँ संस्थान से नई व्यवस्था की उम्मीद
26 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। हम माँ संस्थान के माध्यम से एक नई राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक, संवैधानिक व्यवस्था का प्रारूप समाज के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। इस प्रारूप में हमारा सबसे महत्वपूर्ण विषय है लोक स्वराज। लोक स्वराज गांधी का प्रिय विषय रहा है। यही कारण है कि माँ संस्थान को अधिकांश गांधीवादियों और आचार्य कुल वालों का पूरा-पूरा समर्थन मिल रहा है।
दूसरी तरफ हम नरम हिंदुत्व के पक्षधर हैं। इस नरम हिंदुत्व के पक्षधर होने के कारण हमें आर्य समाज, गायत्री परिवार तथा संघ परिवार के सभी लोगों का समर्थन मिल रहा है। हमें नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत, योगी आदित्यनाथ आदि का भी पूरा समर्थन मिल रहा है।
हमारा तीसरा पक्ष है कि एक स्वतंत्र विचार-मंथन ग्रुप बनना चाहिए। जैसा पुराने जमाने में ब्राह्मणों की भूमिका हुआ करती थी, वे विचार-मंथन के द्वारा ही निष्कर्ष निकालते थे, अन्य कोई आधार नहीं था। इस तीसरे ग्रुप को भी हमें सभी प्रकार के स्वतंत्र विचारकों का समर्थन मिल रहा है।
इस तरह माँ संस्थान लगातार पूरे देश में एक नए तरह की उम्मीद जगा रहा है। अभी अयोध्या में इसका उत्तर प्रदेश का सम्मेलन हुआ था, बहुत अच्छे परिणाम आए। अब अगला सम्मेलन सितंबर की 26-27 तारीख को रांची में आयोजित है, जिसमें बंगाल, ओडिशा, झारखंड और बिहार के लोगों की एक बड़ी बैठक होगी और इन तीन मुद्दों पर उस बैठक में आगे की योजना बनेगी।
मैं तो उस बैठक में नहीं रह पाऊँगा, लेकिन मेरा पूरा आशीर्वाद रहेगा। हम लोक स्वराज और नरम हिंदुत्व के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।
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