भविष्यवाणियों की बाढ़ और समाज में भ्रम
17 सितंबर प्रातःकालीन सत्र। समाज में अनेक प्रकार के भविष्यवक्ताओं की बाढ़ आई हुई है। अनेक लोग दुनिया के समाप्त होने की भी भविष्यवाणी कर रहे हैं, अनेक लोग राजनीतिक चुनाव में जीतने-हारने की भी भविष्यवाणी कर रहे हैं। अनेक तरह की भविष्यवाणियाँ समाज में भ्रम पैदा करती हैं। मेरा ऐसा मानना है कि यदि कोई भविष्यवाणी गणित के आधार पर होती है, वह भविष्यवाणी सच हो सकती है। यदि कोई भविष्यवाणी रिसर्च के आधार पर होती है, तो वह रिसर्च भी सच होने की संभावना रहती है। लेकिन यदि कोई भविष्यवाणी भाग्य के आधार पर होती है, जिसका कोई सिर-पैर नहीं होता, इस तरह की भविष्यवाणियों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। कोई भी भविष्यवाणी जो अवैज्ञानिक है, वह सच हो ही नहीं सकती। इस प्रकार की भविष्यवाणियाँ 50% सच और 50 प्रतिशत झूठ होती हैं। कभी नास्त्रेदमस के नाम से, कभी बंगा बाबा के नाम से, कभी किसी और नाम से इस प्रकार की अवैज्ञानिक भविष्यवाणियाँ समाज में प्रचलित होती हैं। हम इस प्रकार की भविष्यवाणियों का न तो विरोध कर सकते हैं, न समर्थन कर सकते हैं, लेकिन इन भविष्यवाणियों पर जरा भी विश्वास नहीं करना चाहिए। मैंने अपने जीवन में इस तरह की कोई भविष्यवाणी कभी नहीं की है। चुनाव के संबंध में भी सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है, भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। कोई भी ग्रह-नक्षत्र समाज पर अवैज्ञानिक प्रभाव नहीं डाल सकता। हम समाज में इस बात की जागृति फैलाते रहेंगे कि भविष्यवाणियों पर कभी विश्वास मत करिए।
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