राज्य और समाज के बीच संतुलन की आवश्यकता

22 सितंबर प्रातःकालीन सत्र। वर्तमान सामाजिक व्यवस्था में राज्य और समाज का संतुलन बिगड़ गया है। राज्य ने पूरी तरह समाज व्यवस्था पर अपना एकाधिकार कर लिया है और उस एकाधिकार के दुष्परिणाम भी दिख रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए हम सब लोग निरंतर चिंतन कर रहे हैं और उसका मार्ग निकाल रहे हैं। इस मार्ग के रूप में हम दो महीने पहले अयोध्या में उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोग बैठे थे और अब आगामी 26 और 27 सितंबर को रांची में झारखंड, बंगाल, बिहार और उड़ीसा के लोग बैठेंगे।

हम कोई नई समाज व्यवस्था नहीं बना रहे हैं, लेकिन राज्य और समाज के बीच जो असंतुलन पैदा हो गया है, वह असंतुलन दूर होना चाहिए। समाज और राज्य को मिलकर एक साथ कार्य करना चाहिए, न कि राज्य समाज का मालिक हो और समाज गुलाम। वर्तमान समय में राज्य आदेश देता है और समाज उसका पालन करने के लिए बाध्य होता है। यह असंतुलन दूर होना चाहिए। इस असंतुलन को दूर करने के प्रयास ही हम लोगों के संस्थान की एकमात्र उपलब्धि होगी।

रांची कार्यक्रम संपन्न होने के बाद फिर आगे की ओर योजना पर विचार किया जाएगा, लेकिन हम इस बात के लिए दृढ़ संकल्पित हैं कि राज्य और समाज के बीच के असंतुलन को दूर करने में हम पूरे प्रयत्न लगा देंगे। हमारी यह निरंतर कोशिश होगी कि राज्य का समाज के सामाजिक मामलों में हस्तक्षेप घटे और समाज अधिक से अधिक योग्य और शक्तिशाली हो। यही कारण है कि हम दोनों दिशाओं में एक साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।