"भारत के वामपंथी और विपक्षी नेता अक्सर यह दावा करते हैं कि

"भारत के वामपंथी और विपक्षी नेता अक्सर यह दावा करते हैं कि देश की मुख्य समस्याएँ केवल भूख, गरीबी और बेरोजगारी हैं, जबकि हिंदू-मुस्लिम जैसे विषय गौण हैं। मैंने इस पर गहराई से विचार किया है। पिछले 70 वर्षों में, जब कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा का प्रभाव रहा, तब इन समस्याओं का कितना समाधान हुआ और पिछले 10 वर्षों में स्थिति क्या रही, यह गंभीरता से सोचने का विषय है।
मेरा मानना है कि स्वतंत्रता के बाद से गरीबी, भूख और बेरोजगारी जैसी समस्याएँ निरंतर कम हो रही हैं और विकास के साथ इनका समाधान जारी है। ये मूलभूत समस्याएँ नहीं हैं। वास्तविक समस्या यह है कि लंबे समय तक समाज में हिंदुओं को कथित तौर पर 'दोयम दर्जे का नागरिक' बनाकर रखा गया और तुष्टिकरण के माध्यम से विशेष अधिकार दिए गए।
इतिहास गवाह है कि इसी मानसिकता के कारण स्वतंत्रता के समय देश का विभाजन हुआ। आज भी कुछ शक्तियाँ उसी विभाजनकारी सोच को बढ़ावा देकर राष्ट्र की एकता को चुनौती दे रही हैं। गरीबी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे समय के साथ सुलझ जाएंगे, लेकिन राष्ट्रविरोधी ताकतों का खतरा केवल हमारी सक्रियता और जागरूकता से ही समाप्त हो सकता है।
अतः, मैं हर देशभक्त से आह्वान करता हूँ कि धर्म और तुष्टिकरण के नाम पर होने वाले विभाजन के खतरे को जड़ से समाप्त किया जाए। जो लोग गरीबी और बेरोजगारी के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं, उनकी असलियत उजागर करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।"