नई समाज व्यवस्था: कम कानून, अधिक नैतिक संतुलन का प्रस्ताव

2 मई प्रातःकालीन सत्र। हम नई समाज व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं। वर्तमान भारत में नैतिक पतन बहुत तेज गति से हुआ है। भौतिक उन्नति तेज गति से होने के बाद भी नैतिक पतन का बढ़ना एक चिंता का कारण है।

हम लोगों ने इस मुद्दे पर शोध किया है और यह पाया है कि राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में जितने अधिक कानून होते हैं, उतना ही आम लोगों का नैतिक पतन होता है। वर्तमान समय में लगभग 100% लोग झूठ बोलने को या तो मजबूर हैं या उसे लाभदायक मान रहे हैं। सेक्स के मामले में भी लगातार नैतिक पतन बढ़ता जा रहा है। अन्य मामलों में भी लगभग यही स्थिति है, और इन सबका कारण है समाज में नैतिक कानूनों का बढ़ना।

साथ ही, सरकार के भी अनावश्यक कानून नैतिक पतन को बढ़ा रहे हैं। हम नई व्यवस्था में सरकार के 98% कानून समाप्त कर देंगे। समाज भी परिवारों के आंतरिक मामलों में किसी प्रकार के कोई नियम-कानून नहीं बना सकेगा। सेक्स के मामले में नियम-कानून बनाने की स्वतंत्रता परिवारों को होगी, समाज को नहीं।

शराब, जुआ, वैश्यावृत्ति, तस्करी, ब्लैक जैसे हजारों कानून समाप्त कर दिए जाएंगे। समाज भी विशेष परिस्थिति में सिर्फ बहिष्कार कर सकता है, किसी को दंड नहीं दे सकता।

इस तरह हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि समाज में नैतिक पतन को पूरी तरह रोका जा सकता है। हम नई व्यवस्था में इस तरह का बदलाव करेंगे। हम नैतिक उत्थान और भौतिक उन्नति को एक साथ संतुलित रूप से चलने की गारंटी देते हैं।