बंगाल की शेरनी से पिंजरे की कैदी तक : सत्ता, संघर्ष और पतन की कहानी

भारत की राजनीति में ममता बनर्जी को बंगाल की शेरनी माना जाता था। वास्तव में वह शेरनी थी। भारत के नेताओं में इतना तानाशाह, अराजक और हिंसक कोई और नेता नहीं हुआ है। इंदिरा को भी हम ममता से ऊपर नहीं कह सकते।

ममता बनर्जी ने जो इतिहास बनाया, उसे आप शुद्ध राजनीतिक गुंडागर्दी की संज्ञा दे सकते हैं। उसने कभी संविधान की परवाह नहीं की, विपक्ष की परवाह नहीं की, केंद्र सरकार को कभी नहीं माना, न्यायालय और चुनाव आयोग को महत्व नहीं दिया। जिस दबंगई से वह ईडी के कागज छीनकर ले गई, वह एक ऐतिहासिक घटना ही है।

यदि ममता बनर्जी को चुनाव के दिन दोपहर तक धोखा नहीं हुआ होता और ममता बनर्जी को मतगणना के समय यदि पुलिस वालों ने नहीं पीटा होता, तो ममता कोई नया इतिहास रच सकती थी, क्योंकि वह बहुत नाटकबाज भी है।

अब सत्ता जाने के बाद ममता बनर्जी अपनी आँखों से देख रही है कि उसका मुस्लिम वोट भी इधर-उधर निकल रहा है, उसकी पार्टी भी टूट सकती है, ममता का राजनीतिक जीवन समाप्त भी हो सकता है। इसलिए ममता बनर्जी ने आज तय किया है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि संघर्ष करेगी। वह इस तरह मुस्लिम वोटों को इधर-उधर नहीं जाने देगी। उसने अगले तीन-चार दिनों में फिर से सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। वह सरकार से टकराएगी, संविधान से टकराएगी, वह मुसलमानों को फिर से हिम्मत दिलाएगी, वह अपनी पार्टी को फिर से एकजुट करेगी।

मेरे विचार से ममता की अब सफलता संदिग्ध है, क्योंकि अब बंगाल का मुसलमान गृहयुद्ध के लिए तैयार नहीं होगा।

कल हम लोगों ने चर्चा की थी कि किस तरह बंगाल की शेरनी ममता बनर्जी पिंजरे में फँस गई है और अब वह छटपटा रही है। आज हम चर्चा करेंगे कि एक हरियाणा की शेरनी भी इसी तरह एक खिलाड़ी के रूप में सारे देश को नचा रही थी। जब चाहती थी, तब जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ जाती थी और पुलिस वाले बेचारे थर-थर काँपते थे। जब चाहती थी, तब हरिद्वार में जाकर मेडल बहाने का नाटक करती थी। जब मन में आता था, तभी किसी पर यौन शोषण का झूठा आरोप लगा देती थी।

उसे एक महिला होने का इतना घमंड था कि वह किसी को भी, कभी भी, किसी भी रूप में अपमानित कर सकती थी। अभी चार-पाँच दिनों में ही उसने कितना नाटक किया, हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक वह जगजाहिर है और अंत में कल वह कुश्ती में ही परास्त हो गई। अब उसकी बोलती बंद हो गई है।

अभी भी वह नाटक तो करेगी ही, क्योंकि विपक्ष और मीडिया उसके साथ खड़ा है, लेकिन ऐसा लगता है कि अब उसका घमंड धीरे-धीरे उतर जाएगा। जो हाल ममता बनर्जी का हुआ है, वही हाल उसका भी हो जाएगा।

यह बात भारत ने सिद्ध कर दी है कि वह नमूने के तौर पर ही शेर पाल सकता है। अत्याचारी होने वाले शेर पिंजरे में बंद करके ही रखे जाएंगे।