रामविचार नेताम को आशीर्वाद देने पर विवाद: मेरा पक्ष

मेरी उम्र अभी 87 वर्ष है। मैं बाहर आना-जाना भी अब लगभग नहीं कर पाता हूँ। मैं आपातकाल के आंदोलन में 18 महीने जेल में रहा और वर्तमान समय में उसकी वर्षगाँठ मनाई जा रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम मुझे सम्मानित करने के लिए मेरे घर में ही आए, क्योंकि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में वर्तमान में मैं अकेला मीशा बंदी हूँ।

रामविचार जी ने आकर मुझे शाल-श्रीफल भेंट किया और मैंने रामविचार जी को चुनाव जीतने का आशीर्वाद दिया। मेरे आशीर्वाद से रामविचार जी के विरोधी नेताओं को बहुत कष्ट हुआ है, जबकि सच्चाई यह है कि हर चुनाव में वे मेरा आशीर्वाद माँगते हैं और मैं उन्हें देता हूँ, भले ही 42 वर्षों से मैंने वोट न दिया हो।

उसके बाद दो-तीन दिनों से रामविचार नेताम के विरोधियों ने एक अभियान छेड़ दिया है कि मैंने उन्हें आशीर्वाद दिया या उन्होंने लिया। मेरे विचार से मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है और मैं हमेशा रामविचार नेताम के जीतने की कामना करता हूँ। मैं यद्यपि किसी चुनाव में किसी की मदद नहीं करता, लेकिन मेरी यह इच्छा जरूर रहती है कि रामविचार नेताम चुनाव जीतें। जिनको भी इस बात से बुरा लगा, वे गलत हैं, मैं नहीं।

मेरे कुछ मित्रों ने यह जानना चाहा है कि इस सारे षड्यंत्र में किस राजनीतिक दल का हाथ है, कौन व्यक्ति इस सारे अभियान का संचालन कर रहा है। मेरी जितनी जानकारी है, उसके अनुसार आम आदमी पार्टी के एक छत्तीसगढ़ के बड़े नेता का हाथ है। अभी कुछ दिनों पहले ही दिल्ली से संजय सिंह जी ने आकर उस आम आदमी पार्टी के नेता को यह कार्य-भार भी दिया है। सौभाग्य से वह आदमी एक बड़ा पत्रकार भी है और पत्रकार होने के कारण उससे सारे अफसर डरते भी हैं, क्योंकि जो व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का बड़ा नेता हो और वह बड़ा पत्रकार भी हो, तो उसका दबाव स्वाभाविक है।

लेकिन मेरा इन सब से कोई संबंध नहीं है। मेरा राजनीति से कोई संबंध नहीं है। मैं तो अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर रायपुर में रह रहा हूँ। अभी 28 तारीख को मीशा बंदियों के सम्मान में मुख्यमंत्री जी तथा अन्य लोगों ने मुझे भी आमंत्रित किया है, लेकिन मैं उसमें जा नहीं सकूँगा, क्योंकि मैं उस दिन अंबिकापुर रहूँगा।

मैं आपको साफ कर दूँ कि मेरे रामविचार जी से बचपन से अच्छे संबंध रहे हैं और यह बात जगजाहिर है, कोई गुप्त नहीं है। अगर अभी तक पूरे जीवन भर के संबंध कायम हैं, तो मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं है।