उमाकांत जी के नाम एक खुला पत्र
उमाकांत जी पांडे नवभारत, बलरामपुर जिले में एक बड़े पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वे बचपन से मेरी गतिविधियों को लगातार देखते रहे हैं। उन्होंने आज मुझे यह सूचना दी कि मेरे परिवार पर कुछ जमीन संबंधी आरोप लगे हैं। मेरा इस प्रकार के आरोपों से कोई संबंध नहीं है, लेकिन मुझे यह भी पूरा विश्वास है कि मेरे परिवार के लोग कोई ऐसा काम नहीं करेंगे, जिसके कारण मेरे मित्रों को समाज के सामने अपना सिर झुकाना पड़े।
इस प्रकार के समाज-विरोधी तत्व मेरे बचपन से लेकर अब तक आरोप लगाते रहे हैं। मैंने इनका कभी उत्तर नहीं दिया और न कभी आक्रमण किया, क्योंकि वह मेरा न उस समय स्वभाव था, न आज है। मुझे कानून पर भी विश्वास है और समाज पर भी विश्वास है।
मुझे इसी प्रकार के झूठे आरोपों में 18 महीने जेल में भी रखा गया। मुझे इसी प्रकार के झूठे आरोपों के आधार पर नक्सलवादी घोषित कर दिया गया। मेरी सारी जमीन जब्त कर ली गई। मुझे गोली मारने का आदेश हो गया, लेकिन कानून और समाज ने इन समाज-विरोधी तत्वों से मेरी हमेशा सुरक्षा की।
आज भी यदि समाज-विरोधी तत्व कोई आरोप लगा रहे हैं, तो यह कोई पहली बात नहीं है। कानून और समाज, ये दोनों मेरी और मेरे परिवार की सुरक्षा करेंगे। मैं इस संबंध में किसी प्रकार का कोई स्पष्टीकरण देना उचित नहीं समझता, क्योंकि यह मेरा स्वभाव नहीं है। समाज-विरोधी तत्व अपना काम निरंतर कर रहे हैं और मैं अपने स्वभाव के अनुसार अपना काम करता रहूँगा।
फिर भी यदि कोई मेरा निकट का मित्र इस संबंध में कोई सच्चाई जानना चाहेगा, तो मैं उससे व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर सकता हूँ।
मैंने बचपन में ही तीन बातें स्पष्ट की थीं। पहली बात कि मैं दो नंबर का आदमी हूँ, एक नंबर का नहीं। तीन नंबर का मैं पूरी तरह विरोध करता हूँ। दूसरी, मैं कानून तोड़ूँगा नहीं। या तो कानून से बचूँगा या कानून को बदलवाने का प्रयास करूँगा। तीसरी, मैं समाज में झूठ बोलूँगा नहीं और सच बताने से हमेशा बचने की कोशिश करूँगा। मैं अब तक अपनी तीनों बातों पर कायम हूँ।
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