एथेनॉल: पर्यावरण, किसानों और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का प्रश्न

मैंने आज एथेनॉल पर अपने विचार व्यक्त किए थे। हमारे अनेक साथियों को मेरे विचार बहुत बुरे लगे। कुछ ने कहा कि एथेनॉल से गाड़ियों का माइलेज घटता है। उन्होंने कहा कि गाड़ियाँ अधिक खराब भी होती हैं। लेकिन किसी ने इस बात का उत्तर नहीं दिया कि एथेनॉल का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है, एथेनॉल का विदेशी आयात पर क्या प्रभाव पड़ता है और एथेनॉल का किसानों के उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

यदि माइलेज कुछ घट रहा है, यदि कुछ गाड़ियाँ खराब हो रही हैं, तो यह उतनी बड़ी बात नहीं है जितनी पर्यावरण प्रदूषण, विदेश से आयात और किसानों की समस्याएँ। अगर दोनों की तुलना की जाए, तो मुझे ऐसा दिखता है कि मुस्लिम देशों के पक्षकार ही इस तरह की भाषा लिख सकते हैं, जैसा कुछ लोगों ने लिखा।

आप भारत के 140 करोड़ लोगों के दृष्टिकोण से इसका तुलनात्मक अध्ययन बताइए कि एथेनॉल यदि 100% हो जाए, तो भारत और समाज को कितना लाभ होगा और कितना नुकसान होगा। यदि आपके पास कोई तुलनात्मक अध्ययन है, तो मैं जानना चाहता हूँ। अन्यथा, मुस्लिम देशों की वकालत करने वाले लोगों को चुप रहना चाहिए।

अगर आपका विरोध राजनीतिक है, तो मुझे कुछ नहीं कहना है। लेकिन यदि आपका विरोध सामाजिक है, यदि आपका विरोध सैद्धांतिक है, यदि आपका विरोध राष्ट्रीय स्तर का है, तो मैं आपसे दोबारा विचार करने की अपील करता हूँ। आप फिर से सोचकर बताइए कि एथेनॉल से लाभ कितना है और नुकसान कितना है।

मैं अभी अपनी बात पर कायम हूँ कि एथेनॉल से होने वाले नुकसान की तुलना में उसके लाभ कई गुना अधिक हैं।