छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज क्षेत्र के गाँवों में दैनिक मजदूरी लगभग ₹225 है, जबकि रामानुजगंज शहर में यह ₹275 है
12 जनवरी प्रातःकालीन सत्र
हम पिछले आठ दिनों से समाज को तोड़ने वाली विभिन्न राजनीतिक योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आज हम इस विषय पर विचार करेंगे कि किस प्रकार गाँव और शहर के बीच आपसी टकराव पैदा किया जा रहा है।
ग्रामीण उद्योग लगातार बंद होते जा रहे हैं। रोजगार के अभाव में गाँवों के लोग शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। भौतिक सुविधाएँ मुख्यतः शहरों में बढ़ाई जा रही हैं। परिणामस्वरूप शहरों की आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि गाँवों की जनसंख्या धीरे-धीरे अपेक्षाकृत कम होती जा रही है। भारत में शहरों की संख्या बढ़ रही है, जबकि गाँवों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है।
गाँव और शहर के जीवन स्तर में अब बहुत बड़ा अंतर आ गया है। उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज क्षेत्र के गाँवों में दैनिक मजदूरी लगभग ₹225 है, जबकि रामानुजगंज शहर में यह ₹275 है और दिल्ली में एक दिन की मजदूरी ₹500 तक पहुँच जाती है। यही कारण है कि दिल्ली में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है।
आबादी के इस असंतुलन और घनत्व के अंतर के कारण पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्थाएँ भी टूट रही हैं। राजनीतिक दल इसे अपनी सफलता मान रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि गाँव और शहर के बीच इस प्रकार का टकराव एक बड़ी सामाजिक समस्या है। इस समस्या का समाधान हम सभी मिलकर खोज रहे हैं।
Comments